Friday, December 27, 2013

28 ke Amar Ujala me prakashit मैं रेडियो सिलोन से आपका गोपाल’ अशोक मधुप बिजनौर। ‘मैं रेडियो सिलोन से आपका गोपाल’। आज के दिन सन 1931 में बिजनौर के चांदपुर नगर में जन्मे गोपाल शर्मा ने आवाज की दुनिया में वो नाम रोशन किया, जिसका दीवाना उस दौर का हर गायक और फिल्म कलाकार रहा। तमन्ना भी यह होती थी कि गोपाल उन पर नजरें इनायत कर दें तो गाड़ी चल निकले। रेडियो युग में आकाशवाणी दिल्ली से शाम के समय आने वाले किसान भाइयों के कार्यक्रम को सुनने के लिए चौपाल या रेडियो स्वामी के घर पर भीड़ जमा हो जाती थी। सन 1960 के आसपास ‘रेडियो सिलोन’ भारत ही नहीं, एशिया में मनोरंजन का सबसे लोकप्रिय कार्यक्रम प्रस्तुत करता था। विविध भारती शास्त्रीय संगीत पर आधारित कार्यक्रम पेश करता था जबकि रेडियो सिलोन शुद्ध मनोरंजन के लिए जाना जाता था। उस पर भारतीय फिल्मों के सभी नगमे सुनाई देते थे। गोपाल सन 1956 से 24 अप्रैल 1967 तक 11 साल लगातार इस स्टेशन के हिंदी कार्यक्रमों के प्रस्तोता रहे। गोपाल अपनी कामयाबी का राज समय की पाबंदी को देते हैं। वे कहते हैं कि मैं प्रत्येक कार्यक्रम में निर्धारित समय से पहले पहुंचता रहा हूं। रेडियो सिलोन के 11 साल के दौर में कभी लेट नहीं हुआ। आजकल मुंबई में रह रहे गोपाल कमजोर हो गए हैं। उन्हें इंदौर की संस्था ‘सूत्रधार’ नए साल की पूर्व संध्या पर उन्हें सम्मानित करेगी।
आज चौधरी चरण सिंह का जन्म दिन है। इस मौके पर प्रस्तुत है बिजनौर की भूमि से उठे एक तूफान की कहानी जिसने चौधरी चरण सिंह को मुख्य मंत्री पद से त्याग पत्र देने को मजबूर कर दिया लाइसेंस नहीं बनाने पर गिरा दी थी चौधरी चरण सिंह की सरकार अशोक मधुप बिजनौर। स्योहारा सीट से तीन बार विधायक रहे शौनाथ सिंह ने चौधरी चरण सिंह की सरकार महज इसलिए गिरा दी थी, क्योंकि उस समय के जिलाधिकारी ने उनके कहने से एक शस्त्र लाइसेंस नहीं बनाया था और तत्कालीन मुख्यमंत्री चौधरी चरण सिंह ने उनके कहने के बावजूद डीएम का तबादला नहीं किया था। शौनाथ सिंह मूलत: स्योहारा क्षेत्र के गांव बुढ़ानपुर (सलेमपुर) के रहने वाले थे। वे अंगूठा टेक थे। बाद में हस्ताक्षर करना जरूर सीख गए थे। अपनी बात मनवाने के लिए अफसरों से भिड़ जाते थे। यही उनकी जीत का कारण भी बनता था। बात तब की है, जब चौधरी चरण सिंह ने कांग्रेस से अलग होकर भारतीय क्र ांति दल (बीकेडी) बनाई। शौनाथ सिंह नूरपुर (बाद में स्योहारा सीट बनी) से पहली बार 1967 में बीकेडी के टिकट पर विधायक बने। बीकेडी को 98 सीट मिली थीं। सूबे में बीकेडी के समर्थन से कांग्रेस की सरकार बनी और कांग्रेस के चंद्रभानु गुप्ता मुख्यमंत्री बने। फिर कांग्रेस का ही एक गुट विधायक लेकर अलग हो गया। इस दौरान अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग के दौरान चौधरी चरण सिंह ने भी कांग्रेस के नए गुट के साथ कांग्रेस के खिलाफ वोटिंग की। सरकार अल्पमत में आ गई। हालात ऐसे बने कि कांग्रेस को चौधरी चरण सिंह को मुख्यमंत्री और बीकेडी के साथ सरकार बनानी पड़ी। इसी दौरान शौनाथ सिंह ने बिजनौर के तत्कालीन डीएम से एक व्यक्ति के लिए बंदूक का लाइसेंस बनवाने की सिफारिश की थी। सिफारिश नहीं मानी गई। शौनाथ सिंह ने चौधरी साहब से डीएम को हटाने के लिए कहा, चौधरी साहब ने उनकी बात को नजर आंदाज करतें हुए कह दिया कि कहीं इतनी बात पर डीएम का तबादला होता है। यह बात चौधरी श्योनाथ सिह को घर कर गई। उधर, कांग्रेस के विरोध के कारण इंदिरा गांधी चौधरी चरण सिंह से नाराज चल रही थीं। आवास विकास कालोनी में रहने वाले स्व. शौनाथ सिंह के पुत्र बिजेंद्र सिंह के अनुसार इंदिरा गांधी लखनऊ आईं और उनके पिता से गेस्ट हाउस में बातचीत की। कांग्रेस को बहुमत की सरकार बनाने के लिए 25 विधायकों की जरूरत थी। शौनाथ सिंह कुछ ही दिन बाद बीकेडी के 40 विधायक लेकर दिल्ली पहुंचे और कांग्रेस में शामिल हो गए। कांग्रेस ने चौधरी चरण सिंह के सामने इस्तीफा देने या फिर बहुमत सिद्ध करने का प्रस्ताव रखा। चौधरी साहब ने इस्तीफा दे दिया। कांग्रेस की सरकार में शौनाथ सिंह गन्ना विभाग के कैबिनेट मंत्री बने। वह 1980 और 1985 में भी कांग्रेस के टिकट पर विधायक बने। अशोक मधुप
गोपाल शर्मा ने अपनी आवाज से दुनिया में बनाई पहचान अशोक मधुप आज के दिन 28 december सन १९३१ में बिजनौर जनपद के चांदपुर नगर में जन्में गोपाल शर्मा ने आवाज की दुनिया में वो नाम रोशन किया कि उनके समय का हर गायक और फिल्मी कलाकर उनके दीवाना रहे। हर गायक और कलाकर की तमन्ना होती कि गोपाल शर्मा उनपर नजरे करम कर दें और उनकी गाड़ी चल निकले। जानी मानी गायिका आशा भोंसले ने तो उन्हें भाई बनाया था। गोपाल शर्मा के बेटे के जन्म पर वह चांदपुर आईं भी थीं। टीवी से पहले रेडियो युग था। रेडियो के कार्यक्रम सुनने के लिए उस समय लाइन लगती थी। आकाशवाणी दिल्ली से शाम के समय आने वाले किसान भाइयों के कार्यक्रम को सुनने के लिए चौपाल या रेडियो स्वामी के घर पर भीड़ एकत्र हो जाती थी। सन १९६० के आसपास रेडियो सिलोन भारत ही नहीं पूरी एशिया में मनोरंजन का सबसे लोकप्रिय कार्यक्रम प्रस्तुत करता था। विविध भारती शास्त्रीय संगीत पर आधारित कार्यक्रम पेश करता था। उस पर बजने वाले फिल्मी गाने भी प्राय: शास़त्रीय संगीत पर आधारित होते थे। जबकि रेडियो सिलोन शुद्ध मनोरंजन के लिए कार्यक्रम प्रस्तुत करता था और उस पर भारतीय फिल्मों के सभी गाने बजते थे। मनोरंजन के लिए फिल्मों के गाने बजने के कारण रेडियो सिलोन पूरे एशिया में भारतीयों का सबसे पंसदीदा था। गोपाल शर्मा सन १९५६ से २४ अप्रैल ६७ तक ११ साल लगातार इस स्टेशन के हिंदी कार्यकर्मो के अनाउंसर रहे। एक साल की उम्र में गोपाल शर्मा की माता का निधन हो गया। बिना माता की छत्र छाया में पले बढ़े गोपाल शर्मा ने आर्थिक समस्याओं से जूझते हुए मेरठ कॉलेज मेरठ से बीए की परीक्षा उतीर्ण की । बीए करने के बाद फिल्म इंडस्ट्री में भाग्य आजमाने मुंबई पंहुच गए। यहां कुछ बनने के लंबे और अथक संघर्ष में उनकी उस समय के प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता बलराज साहनी से मुलाकात हो गई। कुछ समय उनके ग्रुप में काम किया और बलराज साहनी की सलाह पर रेडियों की दुनिया मेंं प्रवेश कर गए। रेडियो के कैजुअल आट्रिस्ट के रूप में काम करते समय रेडियों सिलौन के लिए चयन हो गया। रेडियो सिलोन में काम करने के दौरान मेरठ में उनका विवाह हुआ। रेडियो सिलोन के लिए ११ साल लगातार काम कर गोपाल शर्मा ने एक रिकार्ड बनाया। भारत लौटकर गोपाल शर्मा ने आकाशवाणी के केजुअल आर्टिस्ट के रूप में काम करने के साथ ही विभिन्न कंपनियों के लिए विज्ञापन बनाने और बड़े कार्यक्रम के संचालन का लंबे समय तक कार्य किया। आजकल गोपाल शर्मा मुंबई में रहतें हैं। अब बहुत कमजोर हो गए। और घर में रहकर आराम कर रहे हैं। वे बताते हैं कि इंदौर की बहुत प्रसिद्ध संस्था है सूत्रधार । यह संस्था देश की विभिन्न हस्ती पंडित रविशंकर,उस्ताद अल्लारक्खा जैसों को सम्मानित कर चुकी है। इस बार नए साल की पूर्व संध्या पर उन्हें गोपाल शर्मा को सम्मानित करने जा रही है। ३० और ३१ दिंसबर को वह इंदौर होंंंगे। वे अपनी कामयाबी का राज समय का पालन करता बतातें हैं। वे कहते हैं कि मै प्रत्येक कार्यक्रम में निर्धारित समय से पहले पंहुचता रहा हॅूं। रेडियो सिलोन के ११ साल के कार्यकाल में एक दिन भी देर से नहीं पहुंचा। बीबीसी लंदन का निमंत्रण नहीं किया स्वीकार अपनी आत्म कथा आवाज की दुनिया के दोस्तों में वह कहतें हैं कि विविध भारती में चयन के लिए बुलाए जाने पर उन्होंने कार्य करने से इसलिए इंकार कर दिया कि उस पर सरकारी तंत्र हावी है। कुछ नया करने वालों की कोई कदर नहीं है। अपनी आत्मकथा में गोपाल शर्मा लिखतें हैं कि रेडियो सिलोन पर कार्य करने के दौरान मै भारत आया था। एक कार्यक्रम में बीबीसी लंदन के रत्नाकर भारतीय जी से मुलाकात हो गई। उन्होंने तुरंत कहा - शर्मा जी आप कहां रेडियो सिलोन में पड़े हैं। आपका स्थान बीबीसी लंदन है। आप जब चाहें तब आपको बुलवा सकता हूं। मैने कहा -भारतीय जी बीबीसी लंदन नंबर एक है। लेकिन मेरा मानना यह है कि आपके प्रोग्राम सुनने वाले भारत में गिने चुने हैं। जबकि मेरा प्रोग्राम सुनने वाले एशिया भर में करोड़ों हैं। मै करोड़ो श्रोताओं का दिल नहीं दुखा सकता। रूपया कमाना मेरा लक्ष्य नहींं है। फिल्म में भी किया काम गोपाल शर्मा अपनी आत्म कथा में लिखतें हैं कि उन्होंने तीन अन्य साथियों के साथ फिल्म अधिकार के भजन माटी कहे कुम्हार में बाल साधु की भूमिका की। मैं सोचता था कि गाने के देा तीन मिनट में स्क्रीन पर मेरा चेहरा एक दो बार दिखाया गया होगा। फिल्म रिलीज हो गई किंतु जेब में इतने पैसे नहीं थे कि फिल्म देख पाते। रेडियो सिलोन पर जाने से पूर्व चांदपुर गया तो हमारे बहुत सीनियर और हाकी के बड़े खिलाड़ी कैलाश मित्तल मेरे से विशेष रूप से मिलने आए। उनका चांदपुर में सिनेमा हाल है। कहने लगे शर्मा जी आपकी फिल्म अधिकार की एंक्टिग से मुझे बहुत आमदनी हुई। मैने जगह - जगह आपके नाम का प्रचार कराया कि चांदपुर का तरूण कलाकार गुरू रघुनाथ प्रसाद का लड़का गोपाल शर्मा फिल्म में काम कर रहा है। इसका इतना असर हुआ कि अकेले चांदपुर में फिल्म अधिकार एक साल तक चली। बिजनौर जनपद में कई साल तक यह फिल्म चलाई और इतनी आमदनी हुई कि हमारा एक और सिनेमा हाल बन गया। मुहम्मद रफी से मुलाकात गोपाल शर्मा लिखतें हैं कि मंै एक बार भारत आने पर ओपी नैय्यर साहब से मिलने गया। मुझे देखते ही नैय्यर साहब ने कहा कि विदेश जाने की सूचना तो रेडियो से दो ही व्यक्तियों के बारे में दी जाती है, एक तो भारत के प्रधानमंत्री और दूसरे रेडियों सिलोन के गोपाल शर्मा की। बाते शुरू ही की थीं कि कुछ ही देर में फोन आ गया। नैय्यर साहब ने कहा आप जिनके बारे में पूछ रहें हैं, वे मेरे पास बैठे हैं। उन्होंने मुझे फोन दे दिया। फोन करने वाले मुहम्मद रफी थे। वे मुझसे मिलना चाहते थे। मैनेंं नैय्यर साहब से आज्ञा ली और रफी साहब से मिलने चला गया।मिलते ही उन्होंने तुरंत मुझे सीने से लगा लिया। बोले जब मैं नया नया मुंबई आया था तो मेरे भाई हमीद साहब ने मेरे लिए खूब भागदौड़ की। मेरा अरमान था कि मुझे जनाब कुंदन लाल सहगल साहब केसाथ गाने का मौका मिले। मौका मिला भी जूही जूही जूही, मेरे सपनों की रानी वाले गीत में। इस गीत के अंत में सोलो लाइन दो बार मैने गाई। संगीत प्रेमियों को यह बात रेडियो सिलोन पर सबसे पहले गोपाल शर्मा जी आप ने ही बताई। महान गायक रफी साहब ही नहीं बल्कि उस समय का हर गायक गोपाल शर्मा से मिलने केलिए उत्सुक रहता था। अशोक मधुप

Saturday, December 21, 2013

12 janvari 2011 me Amar Ujala me prakashit स्योहारा से तीन बार विधायक रहे शौनाथ सिंह की बोलती थी तूती इतिहास लाइसेंस नहीं बनाने पर गिरा दी सरकार चौधरी चरण सिंह से नाराजगी पर 40 विधायक लेकर कांग्रेस में हुए थे शामिल कांग्रेस की सरकार में शौनाथ सिंह गन्ना विभाग के कैबिनेट मंत्री बने • अशोक मधुप बिजनौर। जिले की सियासी इतिहास के पन्ने जब भी पलटे जाएंगे, पूर्व विधायक शौनाथ सिंह का नाम जरूर याद आएगा। स्योहारा सीट से तीन बार विधायक रहे शौनाथ सिंह ने सरकार महज इसलिए गिरा दी थी, क्योंकि उस समय के जिलाधिकारी ने उनके कहने से एक शस्त्र लाइसेंस नहीं बनाया था और तत्कालीन मुख्यमंत्री चौधरी चरण सिंह ने उनके कहने के बावजूद डीएम का तबादला नहीं किया था। शौनाथ सिंह मूलत: स्योहारा क्षेत्र के गांव बुढ़ानपुर (सलेमपुर) के रहने वाले थे। बाद में हस्ताक्षर करना जरूर सीख गए थे। अपनी बात मनवाने के लिए अफसरों से भिड़ जाते थे। यही उनकी जीत का कारण भी बनता था। बात तब की है, जब चौधरी चरण सिंह ने कांग्रेस से अलग होकर भारतीय क्र ांति दल (बीकेडी) बनाई। शौनाथ सिंह नूरपुर (बाद में स्योहारा सीट बनी) से पहली बार 1967 में बीकेडी के टिकट पर विधायक बने। बीकेडी को 98 सीट मिली थीं। सूबे में बीकेडी के समर्थन से कांग्रेस की सरकार बनी और कांग्रेस के चंद्रभानु गुप्ता मुख्यमंत्री बने। फिर कांग्रेस का ही एक गुट विधायक लेकर अलग हो गया। इस दौरान अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग के दौरान चौधरी चरण सिंह ने भी कांग्रेस के नए गुट के साथ कांग्रेस के खिलाफ वोटिंग की। सरकार अल्पमत में आ गई। हालात ऐसे बने कि कांग्रेस को चौधरी चरण सिंह को मुख्यमंत्री और बीकेडी के साथ सरकार बनानी पड़ी। इसी दौरान शौनाथ सिंह ने बिजनौर के तत्कालीन डीएम से एक व्यक्ति के लिए बंदूक का लाइसेंस बनवाने की सिफारिश की थी। सिफारिश नहीं मानी गई। शौनाथ सिंह ने चौधरी साहब से डीएम को हटाने के लिए कहा, लेकिन डीएम का तबादला नहीं हुआ। उधर, कांग्रेस के विरोध के कारण इंदिरा गांधी चौधरी चरण सिंह से नाराज चल रही थीं। आवास विकास कालोनी में रहने वाले स्व. शौनाथ सिंह के पुत्र बिजेंद्र सिंह के अनुसार इंदिरा गांधी लखनऊ आईं और उनके पिता से गेस्ट हाउस में बातचीत की। कांग्रेस को बहुमत की सरकार बनाने के लिए 25 विधायकों की जरूरत थी। शौनाथ सिंह कुछ ही दिन बाद बीकेडी के 40 विधायक लेकर दिल्ली पहुंचे और कांग्रेस में शामिल हो गए। कांग्रेस ने चौधरी चरण सिंह के सामने इस्तीफा देने या फिर बहुमत सिद्ध करने का प्रस्ताव रखा। चौधरी साहब ने इस्तीफा दे दिया। कांग्रेस की सरकार में शौनाथ सिंह गन्ना विभाग के कैबिनेट मंत्री बने। वह 1980 और 1985 में भी कांग्रेस के टिकट पर विधायक बने। 16 जून 1991 को उनका निधन हो गया।