Wednesday, June 17, 2015

१८५७ की आजादी की लडाई और बिजनौर

                                          1857  की आजादी की लड़ाई  में बिजनौर के हालत पर
                                              अमर उजाला में छपा मेरा एक पुराना  लेख

Tuesday, June 16, 2015

बिजनौर जनपद में कपास उत्पादन की जगह गन्ने ने ली

                                     अमर उजाला में सात फरवरी २००० में बिजनोर जनपद
                                       की खेती के बदलाव पर छापा मेरा एक लेख

Sunday, June 14, 2015

हरप्रसाद सिंह एक नौटकी डाइरेक्टर और कलाकार




नौटंकी के जरिए आत्मिक ज्ञान लेने तथा लोगों को समाज सुधार की शिक्षा देने वाले बुजूर्गब हर प्रसाद सिंह के परिजन आज भले ही उनको अपेक्षा की दृष्टि से देखते हों, किंतु ८४ वर्षीय श्री सिंह से बातचीत करते ही उनके स्वाभिमानी गुण देखते ही बन जाते हैं। प्रस्तुत हैं उनसे की गई बातचीत के प्रमुख अंश-
परिचय-गांव सुआवाला थाना अफजलगढ़ निवासी स्व.फकीर चंद चौहान की इकलौती संतान हर प्रसाद सिंह की धर्मपत्नी श्रीमती भानमति का वर्ष १९९२ में देहावासन हो गया है। इनके विवाहित चार पुत्र व दो पुत्रियों सहित पौत्र व धेवतों से भरा पूरा परिवार है।
शिक्षा:हिंदी और उर्दू में मिडिल कक्षा पास।
भूमि व संपत्ति:नौटंकी क्षेत्र में प्रवेश क रते वक्त २६० बीघा जमीन, क्रेशर व टै्रक्टर आदि से पूर्ण विकसित घराना। किंतु अब केवल ५० बीघा जमीन शेष तथा क्रेशर व ट्रैक्टर नहीं रहे।
नौटंकी से लगाव व कार्यक्षेत्र:चौहान थ्रियेटिकल संगीत पार्टी के मालिक हरप्रसाद सिंह ने बताया कि मैं अपने पिता की अकेली संंतान हैं। धन दौलत काफी था। इसलिए मैंने समाज में अपनी पहचान बनाने के लिए नौटंकी बनाने का फैसला किया। इसमे मुझे घरवालों का भी पूरा सहयोग मिला और वर्ष १९३८-३९ में मैंने अपनी नौटंकी बना ली। मेरे यहां सभी कलाकार नौकरी पर रहते थे।
श्री सिंह ने बताया कि उस समय नौटंकी कंपनी से सरकार टैक्स लेती थी। इसलिए हम नौटंकी टिकट पर चलाते थे। उस समय पांच आने व दस आने का टिकट चलता था। अब टैक्स भी माफ है और टिकट पांच रुपये, दस रुपये व २० रुपये तक चलते हैं। उन्होंने बताया कि मेरी पार्टी में करीब ८० कलाकार रहते थे। तथा साजिदें, खाना बनाने वाले तथा सुरक्षा गार्डों की व्यवस्था रहती थी। कलाकारों को १५ रुपये से २० रुपये प्रतिमाह दिया जाता था। अच्छे कलाकारों को १२०० रुपये से लेकर दो हजार रुपये तक देते थे। उन्होंने बताया कि उस समय देश के प्रसिद्ध नौटंकी कलाकार राधा रानी व कमलेश वर्ष १९४३ में मेरे यहां बतौर कलाकार रही। राधा रानी गांव विसालपुर जनपद शाहजहांपुर की रहने वाली है। उन्होंने बताया कि वर्ष १९८७ मैंने नौटंकी दिखाने का कार्य किया तथा बरेली, शाहजहांपुर, टीहरी, चमोली, मुरादाबाद, उत्तरकाशी, नैनीताल, गौचर की प्रदर्शनी, बिजनौर, सहारनपुर में नौटकंी का प्रदर्शन किया।
मनपसंद नाटक: रंगमंचीय के रूप में रामलीला, हरिश्चंद्र, अनार कली, पति भक्ति, श्रीमति मंजरी, जहांगीर का इंसाफ, खून का बदला खून, पदमनी आदि प्रसिद्ध नाटक हैं।
रूचि:मुझे गाने बजाने में विशेष रूचि नहीं थी किंतु डायरेक्शन अच्छा कर लेता था।  रामलीला में रावण, दशरथ, बाली व परशुराम की भूमिका कर लेता था।
परेशानी के क्षण:हल्दौर नुमाईश में एक बार कलाकार राधारानी को लेकर हल्दौर रियासत ने परेशानी में डाल दिया था जो अब भी याद है।
अश£ीलता:अश£ीलता मन से होती है। नौटंकी में तो हर किरदार मन की गहराई से किया जाता है। इसलिए कलाकारों में अश£ीलता घर नहीं करती है। नृत्यिकाएं भी पूजा पाठ करती हैं। उन्होंने कहा कि महिला के किरदार को महिला ही बखूबी अदा कर सकती है। इसलिए हमने महिलाओं को नौटंकी में लिया। उन्होंने कहा कि यह मानना गलत है कि कलाकारों से वेश्यावृत्ति होती है।
पहले से अब अंतर:पहले लोग नौटंकी को ज्यादा पसंद करते थे। किंतु अब तो सिनेमा, टीवी व आपसी वैमनस्यता ने नौटंकी व्यवसाय पर असर डाला है।
सरकार पर रवैया:पहले सरकार टैक्स लेती थी तथा आए दिन पुलिस व अन्य लोग भी बेवजह परेशान करते थे। इससे कलाकारों का मनोबल गिरता था। किंतु अब तो सरकारों ने टैक्स माफ कर दिया है। तथा नौटंकी को संरक्षण दे रही है। जो एक अच्छा कदम है।
जनपद  के अन्य नौटंकी कलाकार: नगीना के मास्टर मुंशीराम, मास्टर बुंदू, उमरी के रमेशचंद, जसपुर के जगदीश, तीबड़ी के पंडित हरप्रसाद, सुआवाला के श्रद्धानंद कौशिक, भज्जावाला के किशोरी सिंह, रतूपुरा के एमपी रामपाल सिंह आदि थे।
संदेश: इसका सदुपयोग करें तो वह आत्मिक ज्ञान प्राप्त कर सकता है। और जो लीक से हट गया वह बर्बादी के कगार पर पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि मैंने आत्मिक ज्ञान प्राप्त किया है। उन्होंने कहा कि लोगों में यह धारणा गलत है कि नौटंकी के चक्कर में मैंने अपनी जायदाद बेच दी। उन्होंने बताया कि क्रेशर व ट्रैक्टर के ब्याज के चक्कर में यह सब हुआ है।
उन्होंने बताया कि मैंने रामलीला से प्रेरणा दिलाकर तीन मुस्लिम कलाकारों को हिंदू बनवाया है। इनमे कलाकार स्व.प्रेमचंद का पुत्र वेद प्रकाश पान भंडार बिजनौर में आज भी है। तथा एक सुआवाला में ही चौहान के धर्मपत्नी का निर्वाह कर रही है।
रोहिताश कुंवर सैनी अफजलगढ़
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श्री हर प्रसाद सिंह का साक्षात्कार हमारे लिए रोहिताश कुंवर सैनी अफजलगढ़ ने २३ जुलाई  २००३ को लिया।नीचे हरप्रसाद सिंह का फोटो और इनकी कंपनी का लैटर पेड़ है । 

Saturday, June 13, 2015

दानिश जावेद स्क्रिप्ट राइटर

             अमर उजाला मेरठ के १४ जून के अंक  में प्रकाशित मेरा एक लेख।