भारत की बडी कूटनीतिक जीत है ब्रिकस का साझा प्रस्ताव
अशोक मधुप वरिष्ठ पत्रकार बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के निर्माण और विकासशील देशों की एकजुटता के इतिहास में एक अत्यंत मील का पत्थर सिद्ध हुआ है। इस सम्मेलन ने न केवल ब्रिक्स (ब्राजील , रूस , भारत , चीन और दक्षिण अफ्रीका) के आर्थिक एवं राजनीतिक महत्व को रेखांकित किया , बल्कि यह स्पष्ट संदेश भी दिया कि वैश्विक शासन व्यवस्था में अब ' ग्लोबल साउथ ' की आवाज को लंबे समय तक अनसुना नहीं किया जा सकता। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद निर्मित पश्चिमी प्रभुत्व वाली वित्तीय और कूटनीतिक प्रणालियों , विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक जैसी संस्थाओं की एकाधिकारवादी नीतियों के उत्तर में दिल्ली सम्मेलन एक सशक्त प्रतिमान बनकर उभरा। भारत की मेजबानी में आयोजित ब्रिक्स (बीरिक्स ) शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों के बीच मतभेदों के बावजूद भारत ने एक साझा ' सर्वसम्मति ' बनाने में सफलता हासिल की। यह भारत की बड़ी कूटनीतिक सफलता है कि तमाम भू-राजनीतिक मतभेदों के बावजूद भारत सभी सदस्य देशों को 45 से अधिक पेजों वाले सर्वसम्मति ' नई दिल्ली घो...