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सिख धर्म संस्थापक व प्रथम गुरु के कदम पड़े थे नजीबाबाद

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: फोटो 1- गुरु नानक देव जी 2-नजीबाबाद का ऐतिहासिक गुरुद्वारा 3- गुरुद्वारा में स्थित गुरु गद्दी दरबार  4- गुरुद्वारा के नये भवन का ले आऊट [           -देश की आजादी के बाद बना था श्री गुरुद्वारा नानक शाही        - भव्य व आकर्षक गुरुद्वारा भवन में मिलेगी जरूरी सुविधा             बिजनौर। ईश्वर एक है,  समानता, भाईचारे व मिल बांटकर खाने का सिद्धांत मानने वाले सिक्ख धर्म के पहले गुरू नानक देव के पवित्र पांव जिस जमीन पर पड़े वहां पर गुरु गद्दी स्थापित कर बनाए गये गुरुद्वारे को अब आधुनिक सुविधाओं से परिपूर्ण नया भवन मिलने जा रहा है। नजीबाबाद के इस ऐतिहासिक, धार्मिक गुरूद्वारे पर अब 3-4 करोड़ रूपया व्यय कर अधिक भव्य बनाया जा रहा है। यह भवन दो तीन वर्ष में  बनकर तैयार  होगा।                                    मान्यता है सिख धर्म के संस्थापक व प्रथम गुरु नानक देव जी ने समाज में सुधार लाने,आपसी सद्भाव ...

अशोक कुमार

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अपूर्वा

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अनिल कुमार त्यागी

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वरूण कुमार त्यागी

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राजाओं की गौरव गाथा का प्रतीक है क्षत्रिय स्तंभ

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  वैसे तो इतिहास के पन्नों में मुगल काल के दौरान क्षत्रिय समाज के राजाओं द्वारा अपने धर्म और देश की रक्षा के लिए किए गए त्याग, बलिदान और संघर्ष की गौरव गाथाएं अंकित है जो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा का  मार्ग प्रशस्त कर रही है। इसी कड़ी में धामपुर नूरपुर मार्ग पर स्थित ग्राम मोरना में  महाराज मुकुट सिंह शेखावत संस्थान  की तीन बीघा भूमि पर 15 जनवरी 2020 मकर संक्रांति के दिन स्थापित क्षत्रिय स्तंभ क्षेत्र के युवाओं को क्षत्रिय समाज के राजाओं की गौरव गाथा से अवगत कराने के लिए एक प्रेरणा पुंज के रूप में कारगर साबित होगा। महाराज मुकुट सिंह शेखावत संस्थान पर स्थापित यह स्तंभ उन वीरों को श्रद्धांजलि है जिन्होंने सन 1542 में महात्मा श्रवण सिंह को अपमानित करने वाले मुगल शासक बाबर के सेनापति फ़तेउल्लाह खान तुर्क को 8 वर्ष की खोजबीन के बाद मुकुट सिंह शेखावत के नेतृत्व में राजपूताने के 12 राजाओं की सम्मिलित सेना के द्वारा मधी युद्ध में परास्त किया गया था। वर्तमान में बिजनौर, अमरोहा व ठाकुरद्वारा का क्षेत्र उस समय (मुगल काल)के मधी जिले के अंतर्गत आता था। इतिहासकारों के अन...

हितेन प्रताप सिंह तड़प

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