लालढांग क्षेत्र की कहानी
लालढांग रोहिल्लों से अंग्रेजों तक इतिहास के एक पुराने दरवाज़े की कहानी नजीबाबाद-हरिद्वार मार्ग से कोटद्वार की ओर जाते हुए जिस लालढांग को हम एक सामान्य गांव बाजार और जंगल के रास्ते के रूप में देखते हैं वो कभी बिजनौर के मैदान और गढ़वाल की पहाड़ियों के बीच एक महत्वपूर्ण रणनीतिक पड़ाव हुआ करता था। लालढांग का इतिहास केवल सड़क जंगल सुलताना डाकू के आवागमन का क्षेत्र और आज की प्रशासनिक सीमाओं का इतिहास नहीं है इसके पीछे प्राचीन पुरातात्विक अवशेष रोहिल्ला सत्ता नजीबुद्दौला मराठों के साथ संघर्ष अवध का प्रभाव ब्रिटिश शासन और पुराने पहाड़ी मार्गों की एक लंबी कहानी छिपी हुई है। लालढांग के आसपास का इतिहास मध्यकाल से भी कहीं पुराना दिखाई देता है इसके निकट स्थित पांडुवाला एक महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल माना जाता है जहां प्राचीन मंदिरों के अवशेष और मिट्टी के बर्तनों से संबंधित पुरावशेष मिलने का उल्लेख मिलता है स्थानीय परंपराओं में लालढांग के शिव मंदिर और पांडुवाला से जुड़े शिवलिंग का भी उल्लेख मिलता है। इससे संकेत मिलता है कि यह भूभाग केवल बाद के राजनीतिक संघर्षों के कारण महत्वपूर्ण नहीं हुआ होगा बल्कि...