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वरूण कुमार त्यागी

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राजाओं की गौरव गाथा का प्रतीक है क्षत्रिय स्तंभ

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  वैसे तो इतिहास के पन्नों में मुगल काल के दौरान क्षत्रिय समाज के राजाओं द्वारा अपने धर्म और देश की रक्षा के लिए किए गए त्याग, बलिदान और संघर्ष की गौरव गाथाएं अंकित है जो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा का  मार्ग प्रशस्त कर रही है। इसी कड़ी में धामपुर नूरपुर मार्ग पर स्थित ग्राम मोरना में  महाराज मुकुट सिंह शेखावत संस्थान  की तीन बीघा भूमि पर 15 जनवरी 2020 मकर संक्रांति के दिन स्थापित क्षत्रिय स्तंभ क्षेत्र के युवाओं को क्षत्रिय समाज के राजाओं की गौरव गाथा से अवगत कराने के लिए एक प्रेरणा पुंज के रूप में कारगर साबित होगा। महाराज मुकुट सिंह शेखावत संस्थान पर स्थापित यह स्तंभ उन वीरों को श्रद्धांजलि है जिन्होंने सन 1542 में महात्मा श्रवण सिंह को अपमानित करने वाले मुगल शासक बाबर के सेनापति फ़तेउल्लाह खान तुर्क को 8 वर्ष की खोजबीन के बाद मुकुट सिंह शेखावत के नेतृत्व में राजपूताने के 12 राजाओं की सम्मिलित सेना के द्वारा मधी युद्ध में परास्त किया गया था। वर्तमान में बिजनौर, अमरोहा व ठाकुरद्वारा का क्षेत्र उस समय (मुगल काल)के मधी जिले के अंतर्गत आता था। इतिहासकारों के अन...

हितेन प्रताप सिंह तड़प

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पनम पूनम जैन अग्रवाल चांदनी

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डॉ वर्षा सिंह

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मेमन सादात

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  बिजनौर की शान मेमन सादात  आज का मेमन कब बसा और उसका नाम मेमन सादात क्यों पड़ा? इसके लिए हमें इतिहास के उन पन्नों को पलटने की जरूरत है, जो आज की युवा पीढ़ी से कोसों दूर है।  आज के मेमन सादात की नींव रखी थी, मुरिसे आला जनाब सैयद शाह अशरफ अली बिन सैयद आरिफ शाह बरखुरदार ने।  उन्होंने इस गांव की संगे बुनियाद रखी थी। आपका मजार आज भी मेमन सादात में स्थित जामा मस्जिद के पास तालाब के किनारे मौजूद है। इस जामा मस्जिद की तामीर भी सैयद शाह अशरफ अली ने ही की थी। जो आज भी तालाब के किनारे मेमन सादात की शान बनकर खड़ी है।  अपने पाठकों को आज हम मेमन सादात के आबाद करने वाले सैयद शाह अशरफ अली के सफर की तमाम बातें साझा करेंगे ताकि इतिहास की यह पन्नें हमारी युवा पीढ़ी के लिए भी ज्ञान का सागर बन सके।  सैयद शाह अशरफ अली के वालिद सैयद आरिफ शाह बरखुद्दार दिल्ली के बादशाह मोहम्मद तुगलक के क्षेत्र की रियासत धर्सो नवाजपुर निकट पटियाला, पूर्वी पंजाब के मालिक  थें।  सैयद आरिफ शाह बहुत ही बड़े दरवेश, कामिल, मुत्तक़ी, परहेज़गार और मकबूल खास व आम थें। क्योंकि धर्सो नवाजपुर और समा...