आज़ादी की गूंज का साक्षी ‘धामपुर का ऐतिहासिक पिलखन’, 141 साल बाद भी अडिग
आज़ादी की गूंज का साक्षी ‘धामपुर का ऐतिहासिक पिलखन’, 141 साल बाद भी अडिग .....1942 के भारत छोड़ो आंदोलन से लेकर न्यायालय और वकालत की विरासत तक समेटे है यादें .....एएसपी कार्यालय परिसर में स्थित शतायु वृक्ष यूपी सरकार की नीति के तहत संरक्षित करने की मांग धामपुर । एएसपी कार्यालय परिसर में स्थित ऐतिहासिक पिलखन का वृक्ष केवल एक पेड़ नहीं, बल्कि देश की आज़ादी की लड़ाई, सामाजिक आंदोलनों और न्यायिक इतिहास का जीवंत साक्षी है। लगभग 141 वर्ष पुराने इस शतायु वृक्ष को उत्तर प्रदेश सरकार की नीति के अंतर्गत संरक्षित किया गया है। स्थानीय इतिहासकार और वरिष्ठ अधिवक्ता गजेंद्र सिंह एडवोकेट के अनुसार यह पिलखन 19वीं शताब्दी से यहां मौजूद है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1942 में जब महात्मा गांधी के आह्वान पर देशभर में ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ शुरू हुआ, तब धामपुर के तत्कालीन नगर पालिका अध्यक्ष एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय चौधरी कुलमणि सिंह ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ खुला बिगुल फूंका था। 12 अगस्त 1942 को उन्होंने अपने नेतृत्व में धामपुर में एक विशाल जुलूस निकाला। स्कूल की छुट्टी कराकर जुलूस को पहले थ...