बिजनौर का श्रोत्रिय परिवार
सोती अपभ्रंश है श्रोत्रिय शब्द का जो कि एक संस्कृत का शब्द है। श्रोत्रिय ब्राह्मणों का इतिहास गुरुग्राम से शुरू होता है। जिस समय सरस्वती नदी गुरुग्राम से होकर बहती थी उसी के किनारे पराशर ऋषि का गुरुकुल था। ईसमें संस्कृत, गणित और वेदों का अध्ययन किया जाता था। वेदों को श्रुतियों में विभाजित कर कंठस्थ करने की प्रथा थी। जो छात्र इस विधा में पारंगत होकर स्नातक बनते थे, उन्हें ही श्रोत्रिय ब्राह्मण कहा जाता था और गोत्र गुरु के नाम से चलता था, इसीलिए हम सब श्रोत्रिय पाराशर गोत्र के हैं। भू-सर्वेक्षण विभाग भी इस बात की पुष्टि करता है कि पूर्व काल में सरस्वती नदी, जो कि जमुना के पश्चिम में बहती थी और हिमालय के ग्लेशियर्स यानी कि हिमनद से निकलने के कारण पूरे साल जल की आपूर्ति का एक मुख्य स्रोत थी। इसके जन्म स्थान पर आई भूगर्भीय, किसी भूगर्भीय क्रिया ने इसके स्रोत को बदल दिया। इसके रास्ते में बसी सारी इंसानी आबादी प्रभावित हुई और स्थान परिवर्तन को मजबूर हो गई। पूर्व की ओर जमुना के किनारे अचानक आबादी बढ़ने लगी। हमारे पूर्वज भी इसी प्राकृतिक घटना से प्रभावित होकर पलायन को मजबूर हुए और क्...