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जगदीश प्रसाद जाखेटिया*

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    निधन 13/112016   नजीबाबाद का  *"जाखेटिया निवास"*  स्वर्गीय *जगदीश प्रसाद जाखेटिया* जी जो प्रमुख गांधीवादी समाजसेवी थे। उनका निवास/बैठक स्थल दशकों तक शहर का एक जीवंत सामाजिक-सांस्कृतिक केंद्र बना रहा। *इस स्थान की खासियतें:* - *स्वतंत्रता संग्राम का केंद्र*: 1940-47 के दौरान यहां से आंदोलन की रणनीतियां बनीं। भूमिगत कार्यकर्ताओं का ठिकाना भी रहा। - *चाय-पान पर पत्रकारिता*: यहां रोज़ शाम को पत्रकार, वकील, शिक्षक जुटते थे। देश-दुनिया पर बहस होती थी। इसे नजीबाबाद का "कॉफी हाउस" कहा जा सकता है। - *गांधी-विनोबा विचारधारा*: सर्वोदय, भूदान, खादी और स्वावलंबन पर लगातार काम हुआ। जाखेटिया जी खुद खादी पहनते थे और विनोबा भावे के भूदान आंदोलन से जुड़े रहे। - *निशुल्क होम्योपैथिक सेवा*: यहां से वर्षों तक गरीबों को मुफ्त दवा मिलती रही। यह सेवा-भाव गांधीवादी रचनात्मक कार्यक्रम का हिस्सा था। - *साहित्य-काव्य*: काव्य गोष्ठियां, मुशायरे और विचार-विमर्श होते रहते थे। कई स्थानीय कवि-लेखक यहीं से निकले। - *शिक्षण व सामाजिक संस्थाएं*: बाल-शिक्षा, प्रौढ़ शिक्षा और महिला जागरूकता के ...

बिजनौर का श्रोत्रिय परिवार

 सोती अपभ्रंश है श्रोत्रिय शब्द का जो कि एक संस्कृत का शब्द है। श्रोत्रिय ब्राह्मणों का इतिहास गुरुग्राम से शुरू होता है। जिस समय सरस्वती नदी गुरुग्राम से होकर बहती थी उसी के किनारे पराशर ऋषि का गुरुकुल था। ईसमें संस्कृत, गणित और वेदों का अध्ययन किया जाता था। वेदों को श्रुतियों में विभाजित कर कंठस्थ करने की प्रथा थी। जो छात्र इस विधा में पारंगत होकर स्नातक बनते थे, उन्हें ही श्रोत्रिय ब्राह्मण कहा जाता था और गोत्र गुरु के नाम से चलता था, इसीलिए हम सब श्रोत्रिय पाराशर गोत्र के हैं।  भू-सर्वेक्षण विभाग भी इस बात की पुष्टि करता है कि पूर्व काल में सरस्वती नदी, जो कि जमुना के पश्चिम में बहती थी और हिमालय के ग्लेशियर्स यानी कि हिमनद से निकलने के कारण पूरे साल जल की आपूर्ति का एक मुख्य स्रोत थी। इसके जन्म स्थान पर आई भूगर्भीय, किसी भूगर्भीय क्रिया ने इसके स्रोत को बदल दिया। इसके रास्ते में बसी सारी इंसानी आबादी प्रभावित हुई और स्थान परिवर्तन को मजबूर हो गई। पूर्व की ओर जमुना के किनारे अचानक आबादी बढ़ने लगी। हमारे पूर्वज भी इसी प्राकृतिक घटना से प्रभावित होकर पलायन को मजबूर हुए और क्...

185 गांव तोड़ना चाहते हैं बिजनौर से नाता

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बिजनौरके 1990 के दंगों के बाद मीडिया को धमकी का पत्र

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जिलाधिकारी अनीस अंसारी का प्रेस नोट

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​कार्यालय जिला सूचना अधिकारी, बिजनौर। दिनांक 13 सितम्बर19 81 ​जिलाधिकारी की एक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार दिनांक 11-9-81 को श्री सत्यवीर सिंह आर्य, परगनाधिकारी, बिजनौर ने  मैसर्स लक्ष्मी देवी डी०-14, नई बस्ती बिजनौर जो कि सीमेन्ट की बोरी बनाने का लाईसेंस बताते हैं की आकस्मिक जाँच की। जाँच में पाया गया कि उक्त फर्म ने उद्योग निदेशालय से 500 बोरी सीमेन्ट का परमिट सीमेन्ट की बोरियाँ बनाने हेतु प्राप्त किया जिसमें केवल 57 बोरियाँ बची हैं। लगभग 105 बोरी सीमेन्ट का कोई हिसाब किताब फर्म द्वारा नही दिया जा सका। इस फर्म के लागू रिकार्ड गोदाम तथा नियन्त्रण कार्यालय में कुल मिलाकर 389 बोरी सीमेन्ट पाया गया जबकि स्टाक के अनुसार 350 बोरी सीमेन्ट होना चाहिये था। फर्म में कोई सेल रजिस्टर, बही खाता नही पाया और न खरीदार को बोरी बेचने का कैश मैमो या रसीद दी जाती है। सेल्स टैक्स विभाग के अन्तर्गत फर्म का रजिस्ट्रेशन भी नहीं कराया गया है। जाली बोरियाँ किसको बेची जाती हैं या असन्तुलित बेची गयी हैं इसकी जानकारी माँगी फर्म द्वारा नहीं दी गई है। एवं जाँच में यह निष्कर्ष निकलता है कि यह फर्म सीमेन्ट की बोरि...

ओमवेश व सतीश पर पुलिस ने थर्ड डिगरी का किया प्रयोग

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  अमर उजाला  पाुच मई 1996 अमर उजाला मुरादाबाद