Tuesday, December 30, 2014

गजलकार व साहित्यकार दुष्यंत त्यागी

सुप्रसिद्ध गजलकार  व साहित्यकार दुष्यंत त्यागी की पुण्यतिथि पर विशेष
हाथों में अंगारों के लिए सोच रहा था,
कोई मुझे अंगारों की तासीर बताए।।
आम आदमी के दु:ख सुख को शिद्दत से महसूस जब किसी शायर और लेखक की कलम करती है तो कालजयी कृतियां जन्म लेने लगती हैं। बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदावर पैदा। सदियों के बाद ही कोई व्यक्तित्व वक्त का सांचा बदलने आता है। डॉ.इकबाल ने जो कहा था वो कितना बड़ा सच था। आम आदमी के हाथों में अंगारे एवं सीने में पीड़ा की गंगा अविरल रूप से बहती रहती है। जब पीड़ा हिमालय का रूप ले लेती है तो कह उठती है :
हो गई है पीर पर्वत सी पिघलनी चाहिए,
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए।
जी हां, ये दुष्यन्त कुमार ही थे, जिन पर आज जनपद बिजनौर ही नहीं, जहां राजपुर नवादा गांव में उनका जन्म १ सितंबर १९३३ को हुआ था, बल्कि पूरा देश गर्व करता है। और करे भी क्यों न, ये वो लाडला गजलकार है, जिसने गजल के मानी ही बदल दिए, नहीं तो गजल का शाब्दिक अर्थ महबूब से बातें करना था। दुष्यंत ने गजल को महबूब के गेसू एवं रुखसारों से निकालकर यथार्थ की जमीं पर उतार दिया।
मैं जिसे ओढ़ता बिछाता हूं,
वो गजल आपको सुनाता हूं।
तू किसी रेल सी गुजरती है,
मैं किसी पुल सा थर थराता हूं।
तभी तो उन्होंने कहा था कि मेरे शेर उस भाषा की तर्जुमानी करते हैं, जिसे मैं बोलता हूं।
और इसलिए जो ख्याति और लोकप्रियता दुष्यंत को प्राप्त हुई, वो अद्वितीय है।
मां का नाम श्रीमती रामकिशोरी देवी एवं पिता का नाम चौधरी भगवत सहाय था। शिक्षा गांव की प्राइमरी पाठशाला से प्रारंभ होकर नहटौर, चंदौसी और अंत में उच्च शिक्षा इलाहाबाद विश्वविद्यालय में संपन्न हुई। यहीं पर दोस्ती कमलेश्वर एवं मार्कण्डेय से हुई। उन दिनों की प्रसिद्ध तिकड़ी। कक्षा १० से ही परदेशी उपनाम से विधिवत लेखन सुमित्रानंदन पंत को अपना गुरू एवं स्वयं को एकलव्य मानकर                                                                               प्रारंभ कर दिया।
१९५५ में कल्पना पत्रिका में नई कहानी परंपरा और प्रयोग शीर्षक से ऐतिहासिक आलोचना का प्रकाशन, १९५६ में सूर्य का स्वागत नामक शीर्षक से कविताओं का संचयन हुआ। काव्य संग्रह आवाजों के घेरे, काव्य नाटक एक कंठ विषपाई, छोटे-छोटे सवाल और उपन्यास आंगन में एक वृक्ष प्रकाशित हुए। सर्वाधिक लोकप्रियता उन्हें गजल संग्रह साये में धूप से मिली, जो आज भी अनवरत रूप से जारी है।
दुष्यंत कुमार ने सामाजिक एवं राजनीतिक विषयों को गजल का विषय बनाया और भरपूर अभिव्यक्ति दीं। ये केवल दस्तावेज ही बनकर नहीं रहे, बल्कि गजल की कलात्मकता के उदाहरण बन गए।
गूंगे निकल पड़े हैं जुबां की तलाश में,
सरकार के खिलाफ ये साजिश तो देखिए।
उनकी अपील है कि उन्हें हम मदद करें,
चाकू की पसलियों से गुजारिश तो देखिए।
दुष्यंत कुमार की गजलें आज ४० वर्ष अंतराल के बाद भी उतनी ही प्रासंगकि हैं जितनी तब थीं। तभी तो शंकराचार्य से लेकर अन्ना हजारे तक संसद से लेकर यूएनओ तक उनकी गजलों के शेर कोड किए जाते हैं।
सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं,
मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए।
मेरे सीने में नहीं तेरे सीने में सही,
हो कहीं भी आग लेकिन आग जलनी चाहिए।
गांव की रामलीला में लक्ष्मण की भूमिका से लेकर गंगा स्नान मेले में बैलगाड़ी में बैठकर जाना और चाव से खिचड़ी खाना और फिर शाम को गंगा में तैरते दीयों को देखकर कालजयी गजल कह जाना आज भी यादों को झकझोर देता है।
हौले-हौले पांव हिलाओ, जल सोया है छेड़ो मत।
हम सब अपने अपने दीपक यहीं सिराने आएंगे।
लेकिन उनका ऐतिहासिक घर रामजानकी भवन आज भी उनकी राह देखता है। वर्षों से बंद वो महल अब खंडहर में तब्दील होता जा रहा है। उन्हें शायद इसका एहसास था।
आज विरान अपना घर देखा,
तो कई बार झांककर देखा,
होश में आ गए कई सपने,
आज हमपने वो खण्डहर देखा।
दुष्यंत कुमार ने सभी को आशांवित होने का महामंत्र दिया।
कैसे आकाश में सूराख नहीं हो सकता,
एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों।

प्रस्तुति - मनोज त्यागी, आलोक त्यागी

३० दिसम्बर के अमरउजाला में प्रकाशित लेख

अफजलगढ़ पर चिंगारी का स्पेशल इशू


अफजलगढ़ पर चिंगारी का स्पेशल इशू

१८ दिसंबर पर चिंगारी सांध्य  ने जनपद के प्राचीन शहर अफजलगढ़ पर विशेष सामग्री छपी । मदीना न्यूज़ पेपर पर भी विस्तार से छापा है 










Tuesday, December 23, 2014

चिंगारी संध्या दैनिक का नहटौर पर विशेष परिशिष्ठ

पूर्व पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह और बिजनौर

पूर्व पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह और बिजनौर 

२३ दिसम्बर २०१४ अमरउजाला 

२३ दिसंबर २०१४ दैनिक जागरण 


पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की दो बेटिओं की बिजनौर में हुई थी शादी



। २३ दिसम्बर १९०२ को जन्में देश के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह ने किसानों के हक की लड़ाई लड़कर किसानों के मसीहा के रूप में अपनी पहचान बनाई है। चौधरी चरण सिंह को जनपद बिजनौर से काफी लगाव रहा है। उन्होंनें चांदपुर में भी अनेक बार जनसभाओं को सम्बोधित कर क्षेत्रवासियों से रूबेरू हुए हैं। चौधरी साहब की दो लड़कियों की शादी जनपद में ही हुई है। चांदपुर विधान सभा क्षेत्र के गांव शादीपुर मिलक में पुत्री शारदा की इंजीनियर वासदेव सिंह के साथ जो वर्तमान में अमेरिका मे हैं तथा नजीबाबाद विधान सभा क्षेत्र के गांव हाजीपुर में एसपी सिंह के साथ शादी हुई है। जो पुलिस कमिश्रर हैं। चौधरी चरण सिंह ने हमेशा से ही किसानों की लड़ाई लड़ी है। बताते हैं कि चांदपुर शुगर मिल भी चौधरी चरण सिंह के प्रयासों की ही देन है। किसानों की लड़ाई लड़ते हुए चौधरी साहब ने अपने मुख्यमंत्री काल में मंडी समिति की स्थापना कराई। नलकूप की नाली के बराबर से निकली चकरोड पर पहले नलकूप कर्मचारियों को ही चलने का अधिकार था लेकिन चौधरी साहब ने किसानों को उस चकरोड पर चलने का अधिकार दिलाया। चौधरी साहब ने कभी जातपात का भेदभाव नहीं रखा। उनका रसोई भी एक दलित समास से था। चौधरी साहब की एक विशेष यह भी थी जब वे किसी प्रोग्राम में जाते थे तो पहले जहां का कार्यक्रम तय होता था वहीं जाते थे। समाजसेवी व पूर्व लोकदल के चांदपुर विधान सभा अध्यक्ष डा.सतेंद्र कुमार शर्मा ने बताया कि सन १९८४ में हुए विधान सभा चुनाव में चौधरी साहब ने लोकदल प्रत्याशी अमीरूद्दीन बादशाह की रामलीला मैदान में हुई चुनाव सभा को सम्बोधित करते हुए सभी समाज के लोगों से लोकदल के लिए मतदान करने का आव्हान किया था। उस समय चौधरीसाहब ने कांग्रेस से दूर रहने की बात की थी। उन्होंनें कहा था धनवान अच्छे नहीं होते लेकिन धनवानों से अभिप्राय चांदपुर के १०-२० लाख वाले धनवानों से नहीं है देश के बड़े धनवानों से है। 

राजीव अग्रवाल 

Sunday, December 14, 2014

नहटौर

 नहटौर पर  ११ दिसम्बर २०१४  के चिंगारी  सांध्य दैनिक में  छापा एक लेख 





Wednesday, December 3, 2014

- भोलानाथ त्‍यागी

पत्रकारिता एवं साहित्‍य में समान रूप से चर्चित- भोलानाथ त्‍यागी का जन्‍म 4 नवंबर, 1953 में बिजनौर के सीकरी बुजुर्ग गांव में हुआ। भोलानाथ त्‍यागी - हिंदी एवं राजनीतिशास्‍त्र से एमए, एलएलबी, पीएचडी हैं। श्री त्‍यागी सात वर्ष की अल्‍पायु में ही पिता के साए से वंचित हो गए । लालनपालन और शिक्षा दीक्षा - पैजनियां (बिजनौर) में हुई। इनके नाना शिवचरण सिंह विख्‍यात स्‍वतंत्रता सेनानी एवं साहित्‍यप्रेमी थे - 
काकोरीकांड के अमर शहीदों का प्रसिद्ध स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय शिवचरण सिंह त्यागी के गांव पैजनियां (बिजनौर) से गहरा रिश्ता रहा है। राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान, राजेंद्र लाहिड़ी , रोशन सिंह, चंद्रशेखर आजाद, जैसे अमर शहीदों ने शिवचरण सिंह त्यागी के यहां , गांव पैजनियां में अज्ञात वास किया था। स्वर्गीय त्यागी एक ऐसे स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्होंने कभी सरकार से न पेंशन ली और न ही कोई अन्य लाभ। पैजनियां गांव को स्वतंत्रता आंदोलनकारियों का तीर्थ भी कहा जाता है। 
जिसके चलते, गणेश शंकर विद्यार्थी, मुंशी प्रेमचंद, आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी, जैनेंद्र कुमार जैन और बनारसी दास चतुवेर्दी जैसे लोगों का शिवचरण सिंह त्यागी के घर आना जाना लगा रहा।
भोलानाथ त्‍यागी को साहित्‍यिक अभिरूचि इसी परिवेश से मिली। कहानी, कविता, गीत, गजल, नाटक, लघुकथा, व्‍यंग्‍य, रिपोर्ताज आदि कई विधाओं में-श्री त्‍यागी समान रूप से लिखते आ रहे हैं। कई रचनाओं का रेडियो एवं दूरदर्शन पर भी प्रसारण किया जा चुका है। उनके ‘चंदनवन की राख’ एवं ‘द्रोणाचार्य का क्‍लोन’ नामक कथा संग्रह ने खासी प्रशंसा बटोरी।
- भोलानाथ त्‍यागी , 49 / ‘विनायकम’, इमलिया कैंपस, सिविल लाइन, बिजनौर (उत्‍तर प्रदेश)
फोन: 09456873005 / 09412567848 ईमेल:bholanathtyagi@gmail.coM

भोलानाथ त्यागी की फेसवाल से साभार