Sunday, April 24, 2011

उर्दू अदब के बेताज बादशाह



किरतपुर में जन्मे थे इजहर असर

अदब की दुनिया के प्रख्यात नाम इजहर असर का बिजनौर जनपद के किरतपुर में 15 जून 1927 में जन्म हुआ था। इजहर असर का 15 अपै्रल को दिल्ली में निधन हो गया। इनका बचपन का नाम मुहम्मद इजहारूल हसन और इनके पिता का नाम मुख्तार अहमद था। दिल्ली विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग के प्रवक्ता खालिद अलवी का कहना है कि हिंदी साहित्य में जो स्थान गुलशनंदा को प्राप्त है, वही स्थान उर्दू अदब में इजहर असर को है। किरतपुर से वह लाहौर चले गए और लंबे समय तक वहीं रहे। वे बंटवारे के समय दिल्ली आकर बस गए। उन्होंने असर किरतपुरी के नाम से भी लिखा।

प्रोफेसर खालिद अलवी के अनुसार बहुत कम लोगों को मालूम होगा कि वे एक बड़े शायर भी थे। प्रसिद्ध शायर ताजवर नजीबाबादी के शिष्य थे। ताजवर नजीबाबादी अपने समय के सबसे बड़े विद्वान थे और लाहौर विश्वविद्यालय में प्रोफेसर थे। प्रोफेसर अलवी बताते हैं कि असर ने उनसे बताया था कि रात को ताजवर की महफिल में बुखारी भाई(आजादी से पूर्व आल इंडिया रेडियो के डाइरेक्टर) फैज और सूफी तबस्सुम भी शरीक होते थे। उनमें मैं इजहर असर उम्र में सबसे छोटे थे। महफिल खत्म होने पर ताजवर कहते, असर रात बहुत हो गई, चलो मैं तुम्हें घर छोड़ आऊं। जब मेरे कमरे पर आ जाते तो मैं कहता उस्ताद आप अकेले जाएंगे, चलो मैं आपको थोड़ी दूर तक छोड़ आऊं। यहां तक की उनका घर आ जाता। फिर उस्ताद कहते। अरे बातों में घर आ गया, चल तुझे छोड़ आऊं। इसी तरह सबेरा हो जाता। इस दौरान उस्ताद शायरी के नुकते समझाते रहते।

बुशारत संकलन

इजहर की शायरी का संकलन बुशारत के नाम से प्रकाशित हुआ। असर तरक्की पसंद शायर थे। प्रोफेसर अलवी कहते हैं कि इसी कारण मुझे कई बार सरदार जाफरी और प्रोफेसर कमर रईस से बात का मौका मिला।

असर के कुछ अशआर

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कभी ये खुशबू कभी मुझको कोई ख्वाब लगा, तेरा बदन मुझे शेरों का इंतखाब लगा,

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बदन की प्यास सजा ली थी मैने पलकों पर, जबां से कहते हुए तो मुझे हिजाब लगा। (संबंधित फोटो 8 पर भी)

विज्ञान के पहले उपन्यासकार थे असर



बिजनौर/किरतपुर। आमतौर से कहा जाता है कि उर्दू अदब सिर्फ गजल लेखन तक सीमित है या थोड़ा बहुत लेखन बस, लेकिन इजहर असर ने पहली बार विज्ञान विषय पर उस समय उपन्यास और कहानी लिखी, जब इस विषय पर हिंदी और बंगला में भी लेखन की शुरुआत नहीं हुई थी।

पांचवें दशक में जब विज्ञान विषय की तालीम भी बहुत कम थी, तब उन्होंने आधी कयामत नाम से साइंस विषय पर उपन्यास लिखा। यह बहुत चर्चित जासूसी उपन्यास था। इसमें पहली बार एक रोबट दिखाया गया था। उस समय इंडिया में रोबट को जानने वाले भी बहुत कम लोग थे। इजहत असर ने इस रोबट को सोचने और समझने और जजबात महसूस करने की ताकत दी। यह रोबट एक हसीना के इश्क में गिरफ्तार होकर अंत में आत्महत्या कर लेता है। अजहर ने लगभग 30 साल तक अनोखा जासूस नाम से मासिक पत्रिका का प्रकाशन किया। इस रिसाले के जासूस का नाम बहराम था। बंबई का रहने वाला यह प्राइवेट जासूस बहराम अपने दोस्त जिंदल की जान बचाने के लिए एक बार चंद्रमा का सफर भी करता है। वहां रूस और अमेरिका की राजनीति का शिकार हो जाता है, फिर अपनी बहादुरी और अकलमंदी से अपनी जान बचाकर और दुनिया को तबाह करने वाला फार्मूला चुराकर भाग आता है,लेकिन अपने दोस्त जिंदल को लाना नहीं भूलता।

असर ने आधी कयामत, अनोखा जासूस जैसे छह सौ से भी अधिक उर्दू उपन्यास लिखे। इनसाइक्लोपीडिया के अनुसार उर्दू में विज्ञान विषय पर उन्होंने सर्व प्रथम कलम उठाई। और पचास से ज्यादा नावेल लिखे।

मेरे अफसाने नाम से प्रकाशित हुआ लगभग तीन से अधिक कहानियों का उनका संग्रह बहुत ही लोकप्रिय हुआ।

‘शमा’ प्रकाशन से निकलने वाली महिलाओं की पत्रिका में उनके उपन्यास धारावाहिक रूप से छपे। इसी कारण उन्हें औरतों पर लिखने वाला लेखक भी कहा गया। उनके लेखों का एक संग्रह साइंस क्या है नाम से हिंदी तथा उर्दू में प्रकाशित हो चुका है। उनके द्वारा लिखा गया नाटक तीसरी आंख भी लोकप्रिय हुआ। उनकी सेवाओं के लिए उन्हें उर्दू अदब के बडे़ सम्मान गालिब अवार्ड से भी नवाजा गया।

किरतपुर। मुहल्ला मुफ्तियान में जन्मे उर्दू के ख्यातिलब्ध साहित्यकार इजहार असर किरतपुरी के इंतकाल से उर्दू जगत एक महान व्यक्तित्व से महरूम हो गया है। सोशल हेल्थ केयर सोसाइटी के महामंत्री डा. अब्दुर्रहमान रश्क के निवास पर हुई शोक सभा में अध्यक्ष डा. अहसानुल करीम प्रमोद गोयल, डा. एनएच मिर्जा, मास्टर मजहर नामी, सर्वेश अग्रवाल, डा. एम जुनैद, डा. एम. फैजान खां, मुहम्मद कुरैश, शुजाउद्दीन, रियाज अहमद मौजूद रहे।
 
 
AMAR UJALA KE BIJNOR DAK ME  23 APRIL ME PRAKASHIT MERA EK LELH

Friday, August 13, 2010

अनदेखी से लोग आहत


आधी टूटी है स्मारक पर शहीद परवीन की प्रतिमा
अवकाश भी नहीं किया
बिजनौर। आजादी के बाद से यहां हर साल 16 अगस्त को शहीद मेला लगता है और परिषदीय विद्यालयों में अवकाश रहता है। इस बार इस मेले का बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी भुला बैठे और उन्होंने इस अवसर पर अवकाश करना गंवारा नहीं किया।
शहीदों की दुर्गति-एक : खस्ताहाल में है नूरपुर का शहीद स्मारक
स्मारक स्थल पर चरती हैं बकरियां, हर तरफ गंदगी
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अशोक मधुप
नूरपुर। 16 अगस्त 1942 को नूरपुर थाने पर तिरंगा झंडा फहराते हुए ब्रिटिश पुलिस की गोली से शहीद हुए गांव गुनियाखेड़ी निवासी परवीन सिंह की याद में नूरपुर थाने के सामने बना शहीद स्थल प्रशासनिक उपेक्षा के चलते बदहाल हो चुका है। आलम यह है कि शहीद स्तंभ के ऊपर लगी शहीद परवीन सिंह की प्रतिमा का एक हिस्सा टूट चुका है। शहीद स्थल प्रांगण में उगी लंबी घास और इसके चारों ओर लगे गंदगी के ढेर शहीद स्थल की बदहाली की कहानी बयां कर रहे हैं।
आजादी के आंदोलन में नूरपुर क्षेत्र के लोगों का भी योगदान रहा है। 16 अगस्त सन 1942 में नूरपुर थाने पर भीड़ द्वारा तिरंगा झंडा फहराने के प्रयास पर ब्रिटिश पुलिस द्वारा गोली चलाए जाने गुनियाखेड़ी निवासी परवीन सिंह शहीद हो गए थे। गांव अस्करीपुर निवासी रिक्खी सिंह और मुंशी राम घायल हुए। बाद में रिक्खी सिंह की जेल में मृत्यु हो गई। शहीदों की याद में आजादी की स्वर्ण जयंती पर जिला स्वतंत्रता संग्राम कमेटी के निर्देशन में 16 अगस्त 1997 को तत्कालीन डीएम मामराज सिंह और सीओ कमल सक्सेना ने शहीद स्थल प्रांगण का उद्घाटन किया था। वर्ष 2005 में नगरपालिका द्वारा शहीद स्थल का सौंदर्यीकरण कराया गया था। तब से लेकर आज तक किसी ने शहीद स्थल की सुध नहीं ली है। जिसके चलते शहीद स्थल पूरी तरह से बदहाल हो चुका है। एसडीएम की अध्यक्षता में गठित कमेटी द्वारा एक वर्ष पूर्व शहीद स्थल प्रांगण में एक बरामदे का निर्माण कराया गया है।
मगर शहीद स्तंभ और शिला पट जर्जर हालत में पहुंच चुके हैं। इसके ऊपर लगी शहीद परवीन सिंह की प्रतिमा के बायीं ओर का हिस्सा पूरी तरह से टूट चुका है। प्रांगण में उगी घास में बकरियां चरती रहती हैं और इसके चारों ओर गंदगी के ढेरों से बदबू उठ रही है। लोगों का कहना है कि 16 अगस्त को लगने वाले शहीद मेले पर जरूर शहीद स्थल की साफ सफाई कराई जाती है। उसके बाद पूरे वर्ष कोई देखने नही आता। आजादी के नायकों की की इतनी उपेक्षा निंदनीय है।
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नूरपुर। शहीद स्थल की अनदेखी से नगर वासी आहत हैं। शिक्षाविद् सत्यवीर गुप्ता का कहना है कि अपनी जान देकर भारत को आजादी दिलाने वालों का सम्मान होना चाहिए। 33 सालों तक शहीद विद्या केंद्र के प्रधानाध्यापक रहे चौधरी भगवंत सिंह का कहना है कि शहीदों के नाम पर स्थापित विद्या केंद्र को आज तक कोई सरकारी सहायता नहीं मिली है। रालोद नेता अजयवीर चौधरी का कहना है कि सरकार द्वारा स्मारक तथा मूर्तियों पर तो बेतहाशा पैसा खर्च किया जा रहा है पर शहीदों की याद में बने स्मारकों के जीर्णोद्धार के लिए कोई बजट नहीं है। यदि प्रशासन ने इसमें सुधार नहीं किया तो पार्टी पुरजोर विरोध करेगी। भाजपा नेता अशोक चौधरी का कहना है कि केवल 16 अगस्त को ही प्रशासन को शहीद स्थल की याद आती है। उसके बाद कोई मुड़कर नही देखता वह पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर स्थल की ओर प्रशासन का ध्यान दिलाने का प्रयास करेंगे।
मेरा यह लेख अमर उजाला में 10 अगस्त 2010 में प्रकाशित हुआ

Friday, May 28, 2010

सजदे में झुकते सिर

सजदे में झुकते सिर

एजाज अहमद का यह लेख अमर उजाला में 27 मई 2010 के अंक में छपा है
बिजनौर जनपद की नजीबाबाद तहसील से करीब आठ किलोमीटर की दूरी पर जोगीरम्पुरी उर्फ अहमदपुर सादात मुसलिम शिया समाज की अकीदत की वह पाकीजा जगह है, जहां के लिए यकीन किया जाता है कि हजरत अली घुड़सवारी दस्ते के साथ यहां पहुंचे थे। जोगीरम्पुरी अकीदत की स्थली कैसे बनी, इसके बारे में अनुयायियों का यकीन है कि मुगल बादशाह शाहजहां के दरबार में अलाउद्दीन बुखारी वफादार दीवान थे। उनके इंतकाल के बाद उनके साहबजादे सय्यद राजू को दीवान मुकर्रर किया गया।

सय्यद राजू जोगीरम्पुरी पहुंचे। उन्हें आलमगीर से खतरा था। वह या अली अदरिकनी वजीफा करते और मौला अली से अपनी हिफाजत के लिए रात-दिन दुआएं मांगते। एक दिन देर से आंख खुलने पर सय्यद राजू को घर की मचान में ही छिपने को मजबूर होना पड़। संयोग से उसी दिन एक घुड़सवारी दस्ता जंगल में आ पहुंचा। दस्ते का नेतृत्व कर रहे नौजवान के चेहरे पर तेज व हाथ में अलम था। बाकी घुड़सवार नकाबपोश थे। जंगल से घास लेकर लौट रहे एक नाबीना ब्राह्मण से नौजवान ने सय्यद राजू की बाबत जानकारी ली। नौजवान ने कहा कि सय्यद राजू के अलावा किसी को भी इस बात की भनक नहीं होनी चाहिए कि कौन आया है।

नाबीना ने फरमाया कि मेरी आंखों में रोशनी नहीं है, मैं जल्द इस काम को कैसे अंजाम दे सकता हूं? दस्ते के मुखिया का हुक्म हुआ कि वह अपनी आंखें बंद कर खोले। नाबीना के आंखें खोलते ही उसकी दुनिया ही बदल गई। आंखों में रोशनी पाकर उसकी खुशी का ठिकाना न रहा। वह भागता हुआ वह सय्यद राजू के पास पहुंचा और कहा कि जिन्हें आप रात-दिन याद करते हैं, वह घुड़सवार दस्ते के साथ आपसे मिलने आए हैं। जब सय्यद राजू वहां पहुंचे, तो दस्ता नदारद था। घोड़ं की टापों एवं मुंह के झाग के निशान मौजूद थे। मायूस सय्यद राजू ने इन निशानों को महफूज कर लिया। 400 साल पहले मौला अली के जोगीरम्पुरी आने पर भले ही उनकी मुलाकात सय्यद राजू से नहीं हो पाई, लेकिन उन्हें ख्वाब में हुक्म हुआ कि दरगाह तामीर कराई जाए। दरगाह तामीर कराने के दौरान पानी की कमी महसूस की गई। एक शख्स ने दरगाह स्थल के नजदीक गूलर के पेड़ की एक शाख से पानी टपकते देखा। कहते हैं, पानी गिरने से जमीन नम हुई। वहां पानी का एक करिश्माई चश्मा फूटा, जिससे पूरी दरगाह तामीर हुई। आज भी इस चश्मे की अहमियत बरकरार है। इसका पानी पीने से चर्म रोग, पेट की बीमारियां और ऊपरी हवाओं से निजात मिलती है।

जोगीरम्पुरी में हर साल चार दिनी मातमी मजलिसें मुनक्किद होती हैं। आज से पूरा दरगाह क्षेत्र फिर से रंज-ओ-गम एवं मातमी मजलिसों के आगोश में समाने जा रहा है, जहां लाखों जायरीन जियारत के लिए पहुंचेंगे। मातमी मजलिसों में रात दिन वाकयात-ए-करबला के साथ हजरत इमाम हुसैन एवं उनके लश्कर को क्रूर बादशाह यजीद द्वारा दी गई दिल दहलाने वाली यातनाओं का उलेमा जिक्र फरमाते हैं, तो शिया साहेबान फफककर रोने एवं सीनाजनी के लिए मजबूर हो जाते हैं। इस दौरान दरगाह के शमशुल हसन हॉल से हर वक्त हजरत इमाम हुसैन, उनके साथियों एवं कुटुंब के लोगों की दीन और इसलाम की हिफाजत के लिए दी गई बेशकीमती कुरबानियों का उलेमा द्वारा किए जाने वाले जिक्र से पूरा परिसर गमगीन माहौल में तबदील हो जाता है।

जोगीरम्पुरी दरगाह आज शिया समाज ही नहीं, विभिन्न धर्मों के अनुयायियों की अकीदत की स्थली बन चुकी है।

(लेखक अमर उजाला से जुड़ हैं)

उत्तर प्रदेश

एजाज अहमद

Saturday, May 22, 2010

स्टेट खत्म हुआ खत्म हुई हॉकी स्पर्धा कराने की परंपरा

आलम

स्टेट खत्म हुआ खत्म हुई हॉकी स्पर्धा कराने की परंपरा

स्टेडियम में लगा दिया आम का बगीचा

बिजनौर। आजादी के बाद देश की रियासतें खत्म हुई तो उनकी रिवायतें भी खत्म हो गई। साहनपुर स्टेट द्वारा तीस साल तक कराए गए हाकी के राष्ट्रीय स्तरीय टूर्नामेंट क ो भी विराम लग गया। तीस साल तक जिस स्टेडियम में हॉकी का अखिल भारतीय टूर्नामेंट होता था, आज उसमें आम का बाग खड़ है।

जनपद की साहनपुर स्टेट अकबरकालीन स्टेट है। स्टेट के एक वारिस प्रदेश सरकार के पूर्व राज्यमंत्री कुंवर भारतेंद्र सिंह के अनुसार सन 1602 में साहनपुर स्टेट बनी और आज का मौजूद किला 1603 में बना। हाकी के राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ रहे वर्धमान डिगरी कालेज के प्राचार्य डा. वीके त्यागी कहतें हैं कि रियासतों ने खेलों को बढ़ने में बहुत योगदान दिया। साहनपुर स्टेट द्वारा तो लंबे समय तक राष्ट्रीय स्तर की हाकी प्रतियोगिताएं काराई गईऱ्। कुंवर भारतेंद्र सिंह के अनुसार साहनपुर में 1921 से हाकी की राष्ट्रीय स्तर की स्पर्धाएं शुरू हुई और यह 1952 तक चली। देश की सभी जानी मानी टीमों ने यहां आकर हिस्सा लिया। भारतेंद्र सिंह के चाचा रघुराज सिंह कहते हैं कि स्वयं बाबू केडी सिंह ने भी यहां हुई प्रतियोगिताओं में भाग लिया था। वे कहते है कि राष्ट्रीय हाकी एसोसिएशन के नियम तो यहां लागू होते ही थे, किंतु किसी मामले में स्टेट द्वारा लिया गया निर्णय भी सभी को स्वीकार होता था।

1990 में छपी लाला बहादुर मैमोरियल हाकी टूर्नामेंट की स्मारिका में वरिष्ठ पत्रकार स्वर्गीय राजेंद्र पाल सिंह कश्यप के बिजनौर जनपद की हाकी नाम से छपे लेख में कहा गया है कि सहानपुर स्टेट का अपना हाकी का क्लब होता था। स्टेट के राजा भरत सिंह हाकी के बहुत दीवाने थे। उन्होंने हाकी सिखाने के लिए कोच रखा हुआ था। राजा भरत सिंह स्वयं और उनके तीन बेटे इस कोच से नियमित रूप से हाकी सीखते थे। इसी कारण यहां प्रतिदिन हाकी की प्रेक्टिस होती थी।

इस स्टेट द्वारा जहां हाकी टूर्नामेंट कराए जाते थे, वहीं अन्य स्थानों के टूर्नामेंट में भी स्टेट क्लब की टीम भाग लेने जाती थी। रणजोत सिंह और गंगा सिंह स्टेट की टीम के जाने माने खिलाड़ होते थे।

कुंवर भारतेंद्र सिंह कहते हैं कि हाकी के लिए स्टेट द्वारा शानदार स्टेडियम बनाया गया था। इसी में प्रतियोगिताएं होती थी। स्टेट खत्म होने के बाद 1952 से स्टेट में हाकी स्पर्धाएं बंद हो गई। क्लब खत्म हो गया ।

हॉकी की प्रतियोगिता बंद होने पर स्टेडियम का कोई उपयोग न समझ स्टेट ने स्टेडियम की जगह बाग लगवा दिए। आज यहां आम का शानदार बगीचा है। दर्शकों के बैठकर देखने के लिए बनी पेड़ अब टूट फूट गई है, पर यह अब भी नजर आती है।


यह लेख अमर उजाला में 18 मई 2010 के मेरठ संस्करण में छपा है

Monday, May 17, 2010

सरकशे बिजनौर अंतिम

अध्याय VII - निष्कर्ष




एक आदमी उन घटनाओं जो दुनिया में होने के बारे में सोचना चाहिए, और खुद को उनके परिणामों के एक अध्ययन से हिदायत प्रयास करते हैं. हिंसा जो हुआ ही Hindustanis के अकृतज्ञता के लिए एक दंड था उथलपुथल. आज वहाँ कई पुरुषों रहे हैं जो केवल अपने जीवन में अंग्रेजी शासन के अनुभवी है. वे अंग्रेजी शासन के अधीन नहीं थे, केवल जन्म, लेकिन यह परिपक्वता के तहत आए थे. संक्षेप में, जो वे जगहें देखा गया विशेष रूप से अंग्रेजी और किसी अन्य का नहीं शासन की जगहें. हिन्दुस्तान में, लोगों को सब करने के लिए इतिहास के तथ्यों से पूर्व बार के बारे में जानने के आदी, पर नहीं कर रहे हैं और न ही किताबें पढ़ने से. यह इस कारण यह है कि तुम लोगों को अन्याय और उत्पीड़न कि पिछले शासकों के दिनों में जगह लेने के लिए इस्तेमाल के साथ परिचित नहीं थे के लिए है. अमीर या गरीब, उस समय में एक व्यक्ति को चाहे आराम से कभी नहीं हो सकता है. यदि आप अन्याय और उन पिछले दिनों की ज्यादतियों के साथ परिचित था, तुम अंग्रेजी शासन के मूल्य की सराहना की होगी और भगवान को धन्यवाद दिया. लेकिन तुम भगवान का आभारी कभी नहीं थे और हमेशा असंतुष्ट बने रहे.



भगवान सज़ा दी है आप इस अकृतज्ञता Hindustanis के लिए, और आप फिर से पूर्व के समय की सरकार का एक नमूना अनुभव करने की अनुमति दी, के बाद वह एक कम समय के लिए अंग्रेजी शासन निलंबित कर दिया. बिजनौर जिले के निवासियों ओह! तीन घटनाओं को क्या हुआ जो आप के बारे में सोचो - बस अधिकार की एक छोटी निलंबन के साथ कैसे, कोई नहीं शासन किसी भी असली ताकत और बल अधीन. अन्याय कैसे और बर्बर लोगों के घरों के हजारों लूटे, आग से razed गांवों के स्कोर के साथ उन दिनों में अपने साथी पुरुषों के लिए गए थे और सैकड़ों लोग मारे गए, और हजारों लूट लिया और गरीब. वहाँ कोई नहीं है जो अगले करने के लिए खुद को एक गांव से एक सुरक्षित यात्रा बीमा करने के लिए पर्याप्त शक्तिशाली था.



लगता है कि कैसे मुसलमान, और अंत में शुरुआत में दोनों जिला में मजबूत हुआ, और जो पारंपरिक राज्यपालों बुलाया गया शासन के रूप में यदि यह केवल अपने बुजुर्गों किया गया था, और कोई नहीं, जो जिला स्थापना की थी. उनके शासन के एक दृश्य ले लो, और याद कैसे जिले के हिंदुओं बर्बाद कर रहे थे, की हत्या, और plundered. जिला के महान Rais-es बर्बाद कर रहे थे और निर्वासन में जुड़ गया है. निर्दोष हिंदुओं के स्कोर जब्त किया गया और मार डाला, जबकि उनकी संपत्ति, प्रभाव, और घरों सब लूट लिया गया. मुसलमानों, उनके भाग के लिए, अच्छी तरह से क्यों उन नवाबों उन्हें नुकसान नहीं किया था का सवाल विचार हो सकता है. यहां तक कि यह केवल राजनीतिक स्वार्थों की बात थी, के लिए wretches ही उनके पक्ष में मुसलमानों रखने में दिलचस्पी रखते थे. भगवान - ना करे अगर उनकी सरकार को स्थिर था बस एक छोटी सी है, तो आप मुसलमानों को देखा है कि कैसे अपने सह religionists क्रूर और आप अन्याय किया जा सकता है.



समय था जब नवाबों ascendent [में थे और सरकारी नियंत्रण] के बीच आ अंतराल में, हिंदुओं काफी मजबूत करने के लिए कुछ दिनों के लिए हावी हो गया है, ताकि Chaudhris को जिला शासन कर रहे थे. तुम तो हिन्दुओं की सरकार स्वाद सकता है, और देखो क्या मुसलमान हिंदू अनुभवी हाथों में: कितने घरों को लूट लिया, कितने गांवों razed, और भी अपने खुद तबाह womenfolk. सच्चाई तो बोलो. अंग्रेज़ी इस जिले में चौवन साल शासन किया. किसी भी व्यक्ति, हिंदू या मुस्लिम, किसी भी परेशानी या झुंझलाहट तो अनुभव किया था? आप यह क्या याद हिन्दुस्तानी सरकार द्वारा आपदाओं थे अपने सिर पर नीचे लाया नहीं कर सकता, विद्रोह के उस समय में? पूर्व महान सम्राटों के शासन पर इतिहास की पुस्तकों के लिए जाओ क्रूरताओं और संगठित सरकारों के उन दिनों की आम लोक द्वारा वहन आपदाओं की सीमा को मापने.



एक आसानी से नहीं सौ हज़ारवां भाग भी उपस्थित तो था, जो अंग्रेजी के समय में अपने बहुत से गिर गया. देखो कि कैसे हिंदू और मुसलमान सभी आसानी से रह रहे हैं और अंग्रेजी शासन के अधीन शांति में. मजबूत कमजोर अभी नहीं tyrannize कर सकते हैं. प्रत्येक भगवान पूजा अपने धर्म की आवश्यकताओं के हिसाब से और उसके निर्माता. वहाँ रहने और जीने दो का माहौल है. बोला, जिसमें हिंदू पूजा करने के लिए मंदिरों में बनाता है, जहां मुस्लिम मस्जिदों प्रार्थना कर रहे हैं पढ़ने के लिए और प्रार्थना करने के लिए फोन बनाता है. कोई उन्हें रोकने के लिए एक, और कोई करे है. व्यापारी अपने व्यापार के मामलों के कर्मों को, माल सौंप एक कमजोर और वृद्ध एजेंट, जो हजारों मील भेजा जाता है एक लाभ कमाने के लिए हजारों के लायक है, और वहाँ डाकू या ठग का कोई डर नहीं है. और सड़कों - कैसे वे पूरी तरह से सुरक्षित, कर रहे हैं महिलाओं, गहने से सजी रुपए के मूल्य हजारों में रात में सवारी कर सकते हैं घोड़े carriages खींचा मंच से मंच करने के लिए, सभी काफी चिंता से मुक्त. मालिक कृषक खेतों में व्यस्त है, और कोई जरा भी इन क्षेत्रों के लिए नियुक्त किराया से अधिक लेता है.



यह न्याय है, यह आसानी, यह स्वतंत्रता है, और यह गैर हस्तक्षेप, - उनमें से कोई भी जो सभी ब्रिटिश शासन के इस युग में अस्तित्व में कम से पहले अनुभवी थे, किसी और के शासन के अधीन, कहानियों की परवाह किए बिना या करने के लिए घमंड इसके विपरीत, या धर्म और लोगों की. आप इन आप एहसान के लिए शुक्रिया अदा नहीं किया था यहोवा सर्वशक्तिमान लोग. प्रतिशोध गिर गई, और तुम एक खुशी या दो से सरकार के परिवर्तन के साथ स्वाद दे दी है. सर्वशक्तिमान है बुद्धि इस सब में प्रकट किया गया था, के लिए अब आप हमारे अंग्रेजी सरकार के लायक परख और सराहना करते हैं कि आपके सिर पर इसके संरक्षण की छाया सचमुच फोनिक्स की छाया से बेहतर है हो सकता है मुगल शासन] के प्रतीक [. तुम भगवान को अपने हृदय से आभारी दिखाने के लिए जारी कर सकते हैं.



यह हिन्दुस्तान में प्रथागत हो गया है कि जब किसी भी व्यक्ति कुछ शक्तिशाली देश का नियंत्रण प्राप्त की, आम लोगों के लिए उस की आज्ञा मानते दायित्व स्वीकार किए जाते हैं, हर कोई अपने साथी और समर्थक बन गए. जब वह चला गया और किसी और आया, नवागंतुक भी सभी के द्वारा माना गया था, इस बात को समझने की कोशिश करें. यह संबद्ध करने के लिए अनुचित इस परंपरा के साथ अंग्रेजी सरकार नहीं है. आम लोगों स्वतंत्रता पूर्व की सरकारों के तहत हिन्दुस्तानी का आनंद नहीं किया, दिन के शासकों रखा उन्हें अन्याय और हिंसा और अनुचित सरकार के सभी प्रकार के नीचे कुचल दिया. सच में उनकी संपत्ति,, उन tyrants की संपत्ति जब्त कर लिया जो वे क्या चाहते थे और पर जुर्माना लगाया जाता है जिसे वे गलती के संबंध के बिना प्रसन्न था. हमारे अंग्रेजी शासन करने के लिए प्रत्यक्ष विपरीत में, आम लोगों को इस तरह सरकार के अधीन कोई अधिकार नहीं मज़ा आया.



अब लोगों को स्वतंत्रता प्राप्त है, और प्रत्येक व्यक्ति को अपने स्वयं के मामलों के मालिक है, वह करता है के रूप में वह चाहता है. हद है कि अंग्रेजी सरकार ने अपने ही हद तक ही सही होता है, यह भी लोगों के अधिकारों की सुरक्षा की सुरक्षा करें. यदि नीच चमार [मोची सरकार की] विषय को पता है कि सरकार भी अपने अधर्म पैसा ले लिया है, वह अपने ही सरकार के खिलाफ एक कार्रवाई लाने के लिए न्याय प्राप्त कर सकते हैं. यह लोगों के रूप में हालांकि अधिकारियों और सरकार में भागीदार थे. सरकार के इस प्रकार के तहत, वहाँ एक शुल्क कि इस विषय पर पड़ता है, कि प्रत्येक व्यक्ति को जरूरी और ठीक से पूरा करना चाहिए. इस शुल्क की आवश्यकता है कि उनकी सरकार इस विषय के पक्ष रखना चाहिए. इस खाते के एक अपराधी और दोषी renders पर विफलता. यह हिन्दुस्तान के प्रत्येक विषय पर उस नाजुक समय है कि वह सरकार के साथ की ओर है और सरकार द्वारा अपने कर्तव्य करना चाहिए में अवलंबी था. इस तरह के पक्षपात इन अर्थ है: के लिए समर्थन और अधिकतम संभव सीमा तक सरकार की मदद करने के लिए और सरकार के प्रतिद्वंद्वी की मदद से बचना है, ताकि हिन्दुस्तान के पूरे आम लोगों की सरकार का समर्थन बन जाएगा.



सरकार के दुश्मन तो हर जगह में फर्म प्रतिरोध का सामना होगा, सरकार, इसके भाग के लिए, इसका आम लोगों की हालत, जो इस प्रकार अधिक स्वतंत्रता और सम्मान हासिल होता होगा और अधिक ध्यान देते हैं. एक सरकार की उत्कृष्टता बस के रूप में विषयों के अपने कैरियर में पाया जा सकता है और उसके न्याय के वितरण, माप की तरह में है, तो विषय का भरोसा सरकार की ओर अपने पक्षपात में पाया जाता है. इस संबंध में, आप लोगों को लापरवाह पाए गए. इसके विपरीत, और भी लापरवाही से, के लिए आप अपने सभी देशवासियों को अपमान लाया है. होगा कि आप ऐसा नहीं किया था! के लिए प्रतिशोध में बुराई दिनों जो आपके बहुत गिर गया है तो आएगी? अब भी आप के लिए सरकार द्वारा अपना काम करो, ताकि आप दूर आज्ञाकारिता और सरकार को ईमानदारी से सहायता अपमान जो आपके स्थल था ठंडे पानी से धोना चाहिए सकता है, और इतनी है कि आप के लिए अच्छा हो सकता है परिणाम मिल सकता है.







घोषणा

जबकि, इस राजद्रोह के दौरान अपनी वफादारी के लिए अपनी तीन नौकरों चुकाने के लिए, सरकार ने श्री अलेक्जेंडर शेक्सपियर (अपने भाग्य वृद्धि हो सकती है की रिपोर्ट के उस पर खाते का प्रस्ताव!) 5 जून 1858, 56 नंबर और 23 जून 1858, नंबर दिनांक 75, और रोहिल्खंड के आयुक्त की रिपोर्ट दिनांक 1 जुलाई, 1858, और सद्र-29 जून, 1858, 732 नंबर दिनांक DiwaniAdalat के प्रख्यात अधिकारियों की रिपोर्ट है, और सरकार के आदेश 12 जुलाई 1858, दिनांकित, 2379 की संख्या: सैयद अहमद खान , सद्र अमीन, बिजनौर, अल सद्र-Sudur प्रधानाचार्य सद्र अमीन [या अधीनस्थ न्यायाधीश], मुरादाबाद में नियुक्त हो सकता है, और इसके अलावा में रुपये की पेंशन प्राप्त करते हैं. उसके जीवन की अवधि के लिए एक महीने में 200 और कहा कि उनके सबसे बड़े पुत्र का, और कहा कि Muhamad Rahmat खान, डिप्टी कलेक्टर, बिजनौर, Khorja, जिला बुलंदशहर, भूमि राजस्व के लिए मूल्यांकन किया जिसका रुपए से कम नहीं हो सकता है निकट जमींदारी के गांवों में दी जा . 5000 एक वर्ष है, और है कि मीर अली Turab Tahsildar डिप्टी कलेक्टर और डिप्टी मजिस्ट्रेट और रैंक करने के लिए प्रोत्साहित किया जा जिला आगरा भूमि राजस्व के लिए मूल्यांकन किया जिसका रुपए से कम नहीं हो सकता है में जमींदारी के गांवों में प्रदान किया. 2500 वर्ष. इन सचिव से एक पत्र में सरकार को दिया गया 29 जुलाई, 1858, 2703 दिनांकित नंबर, के लिए स्वीकृति.

अब हमारे संरक्षक सरकार के संरक्षण को देखो, और यह लायक है और जो लोग इस विद्रोह में, अपनी वफादारी दिखाई की गरिमा ऊंचा करने के लिए.



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सरकशे बिजनौर भाग छह

अध्याय VI - Ambasut का युद्ध और ब्रिटिश विजय




प्रमुख इस्माइल 17 पर इस पैंतरेबाज़ी दोहराया जबकि पूरी सेना के इस प्रकार के रूप में विस्तृत आदेश में शिविर (भूमि के निकट पुल से पार कर) को Ambasut की ओर मार्च: मोहरा: एक कंपनी है, 70 राइफल रेजिमेंट, विशेष गार्ड के रूप में प्रस्तावित कार्रवाई के लिए, एक कंपनी के 70 राइफल रेजिमेंट, तोपखाने दो टुकड़े की रक्षा के लिए; सैपर्स और खनिकों और घोड़े की एक स्क्वाड्रन. मुख्य शरीर: एक हार्स का स्क्वाड्रन और आर्टिलरी पार्क, कप्तान ऑस्टिन, 70 राइफल पंजाब रेजिमेंट फुट ब्रिगेड के साथ, आपूर्ति और मुल्तान युद्ध हार्स स्क्वाड्रन के साथ खजाना. रियर: पंजाब पैर और हार्स के एक स्क्वाड्रन की एक कंपनी. मुख्य शरीर से, एक कंपनी हिंदुस्तान फुट, हार्स के आधे से एक कंपनी द्वारा समर्थित प्रत्येक, प्रत्येक के प्रत्येक पार्श्व पर तैनात थे.



सड़क मुश्किल था और जंगल दोनों पक्षों पर काफी मोटी थी. जब कप्तान Draymond ऊपर मोरचा के अपने लाइन सेट, अहमद अल्लाह खान Daranagar पर था. वह वहाँ से Ambasut, वह कहाँ है Mareh बल और कुछ घोड़े से 1000 सैनिकों के साथ 16 पर आ करने के लिए मार्च किया. 17 वह नदी की ओर मार्च किया पर वहाँ से. हमारी सेना के बाद Paili नदी की दिशा में छह मील उन्नत था, अग्रिम गार्ड जागरूक हो गया कि दुश्मन के पास गया था. प्रमुख Matar बहुत सावधानी से एक बहुत ही उच्च स्थान पर एक राइफल कंपनी तैनात है और हार्स और आर्टिलरी का आदेश दिया गांव की ओर Shampur, जहां लड़ाई शुरू अग्रिम. जनरल जोन्स कप्तान Carradine और उसके स्क्वाड्रन और कप्तान ऑस्टिन आर्टिलरी आदेश को आगे सरपट, और सैनिकों के रैंकों के रूप में, करने के लिए दुश्मन की स्थिति पर अग्रिम.



हम Daranagar में इन घटनाओं की है कि सुनवाई ऊपर कहा, अल्लाह अहमद खान Ambasut आना पड़ा. सच में अपने लक्ष्य के लिए बाहर ले जाने के लिए एक रात हमला किया गया था, लेकिन यह निरर्थक साबित हुआ क्योंकि संयुक्त सरकार आर्टिलरी रेजिमेंट राइफल, और मुल्तान स्क्वाड्रन ढीला ऐसी आग दो कि पूरी तरह से dumbfounded दुश्मन बन गया. जनरल जोन्स तो जल्दी के लिए अग्रिम आदेश दिया था, और कप्तान Carradine सभी दिशाओं से दुश्मन मारा, जबकि गंजगोला आग भी लगातार उन पर निभाई. दुश्मन तो भाग गए, और कुछ बिखरे हुए दौर को छोड़कर आगे नहीं प्रतिरोध की पेशकश की. ही दुश्मन Ambasut में एक मजबूत स्थिति है, जहां वे स्वयं में दिया था अच्छी तरह से खोदा, लड़ाई में किसी भी प्रयास के बिना.



पुरुषों के सैकड़ों दूर फेंक अपने जूते, वर्दी, और इस लड़ाई में हथियार. हथियारों हर जगह सड़क पर बिखरे हुए थे और जंगल में, और वहाँ एक तरह के साथ हर दूसरे कदम पर झूठ बोल लाश थी. एक जानबूझ कर लाशों का परीक्षण अयोद्धा, मैं उन्नत करने के लिए अगर मैं किसी को पहचान सकता है के रूप में मेरे पीछे की स्थिति से. वहाँ मृतकों में नहीं मनाया व्यक्ति था, लेकिन मैं निश्चित रूप से मिला, दो विद्रोही सैनिकों की लाशों [tilinge]] [. मुझे लगता है कि दुश्मन हताहत 300 और 350 के बीच थे अनुमान है, जबकि सरकार की ओर वहाँ केवल एक दुर्घटना का शिकार होता था. कब्जा आइटम 4 तोपखाने टुकड़े, प्लस सभी गोला बारूद Ambasut पर और तंबू भी शामिल है. दुश्मन को Najibabad की ओर से केवल दो तोपखाने टुकड़ों के साथ बनाने के लिए सक्षम था. सेना के बाद एक संक्षिप्त अंतराल Bhaguwala में पड़ाव डालना करने के लिए पर चला गया. इस बिंदु Najibabad और नांगल दोनों ही आठ मील दूर थे से.



इस हार के बाद, अहमद खान और अल्लाह अल्लाह शफी खान को पुरुषों के छोटे दलों के साथ अलग अलग दिशाओं में भाग अलग कर दिया. कई सैनिक और सैनिकों दौड़ा Najibabad करने के लिए सीधे, जबकि अन्य नांगल लिए दौड़ा, पुरुषों के अधिकांश, हालांकि, अपने जूते फेंक दिया और हथियार और वर्दी के लिए जंगल में छिपा है. थोड़ा पहले लड़ाई शुरू हो गया था, मेजर इस्माइल एक विप्लव बनाया उलझन में डालना और नांगल में दुश्मन को फैलाने. शफी अल्लाह खान बाद में अपनी उड़ान के दौरान नांगल पहुँच के लिए अहमद खान द्वारा अल्लाह के बाद शीघ्र ही पालन किया. वे दोनों को देश छोड़ने को तैयार Najibabad आया था. बागी नेताओं 5:00 पर Najibabad छोड़ दिया है. वे उनके साथ Ambasut पर दो तोपें टुकड़े लिया क्षेत्र से, नांगल में चार क्षेत्र से टुकड़े, और एक टुकड़ा है कि नवाब महमूद खान के निजी स्टाफ का था. इस उड़ान में ले लोगों के बीच चौधरी रणधीर सिंह और Kirani, बिजली के तार क्लर्क थे. जनसंख्या भी Najibabad छोड़ दिया, और यह पूरी तरह से सुनसान करना.



जनरल जोन्स इस तिथि कि दुश्मन नांगल से अपने टेंट हड़ताली बिना भाग गया था पर खबर का स्वागत किया. एक आदेश मेजर इस्माइल करने के लिए दिया था कि वह गंगा के पार भारी तोपखाने लेना चाहिए. आदेश किया था, मेजर है इस्माइल तोपखाने और पहले पंजाब स्क्वाड्रन उनके भारी बंदूकों के साथ, गंगा forded. प्रमुख हाउस उन्हें नांगल से रात में शामिल हो गए और फिर अपने शिविर में लौट आए. .



) 1 Najibabad और सरकार की जीत पर हमला



सेना के इसी क्रम में 18 मार्च, Bhaguwala के जरिए Najibabad के लिए. तोपखाने आग के तीन विस्फोट सेना के रूप में सुना रहे थे Malan नदी के पास पहुंचा. इसमें कोई शक नहीं है कि विद्रोहियों के नेताओं पूरी उड़ान में थे हो सकता है. पूरे शहर सुनसान था. कुछ सैनिकों को पत्थर का गढ़ किले में अभी भी थे. वे तोपखाने टुकड़े को छोड़ दिया करने के लिए अपनी उड़ान की सुविधा.



जनरल जोन्स करने के लिए ब्रिगेडियर कुक करने के लिए अग्रिम आदेश दिया था. उन्होंने कहा, तदनुसार, आगे चले गए. शहर पूरी तरह से सुनसान था. कुछ बागियों उड़ान में देखा गया था के रूप में सेना के किले के पास पहुंचा. सैनिक अपने घोड़े spurred और मारे गए उनमें से 30 के बारे में. शहर और किले इस प्रकार पूरी तरह से पर विजय प्राप्त की थी और सुप्रीम सरकार के नियंत्रण में है. छह तोपखाने टुकड़े, गोले, और युद्ध सामग्री किले से लिया गया था, और दो तोपें टुकड़े शहर में ले जाया गया, एक अल्लाह अहमद खान के घर के दरवाजे पर एक और कारखाना जहाँ तोपखाने टुकड़ों से निर्मित किया गया है. (एक तिहाई टुकड़ा बाहर किले और शहर के बीच लिया गया था). शहर को लूट लिया गया था और विनाश करने के लिए पर एक महान आग से दिया जाता है.



यह बहुत दुख की बात है, जैसा कि हमारे नेताओं को इस आग का अनुमोदन नहीं किया. शायद आग मौका द्वारा शुरू किया, और कोई इसे रोकने के लिए तरीका है, क्योंकि शहर खाली और पानी था दुर्लभ था. हालांकि, यह आमतौर पर स्वीकार कर लिया गया है कि हिंदुओं के घरों जिसका नवाब ने आग पर सेट करने के लिए शहर में आग लगा दी और इस तरह अपने दिल में कड़वाहट में आसानी के अवसर का फायदा उठाया. शायद यह है कि क्या हुआ.



2) पत्थर के गढ़ किले में स्थिति



यह उचित है कि मैं कहना चाहिए है कुछ के बारे में किला पत्थर गढ़ कहा जाता है. नजीब खान 1755 ई. में बनाया. एक लड़ाई 1758 में लड़ा गया था. Jhanga राव Sindia और Malharao Marhatta Najibabad लूट लिया था और किले के बाद वे पास Gaomukh फ़ोर्ड में पार कर गया. फिर, शाह आलम के दिनों में, किले आग के अंतर्गत आ गया था और नजफ नवाब खान, सिंधिया, और Takuji Marhatta द्वारा संयुक्त Zabita खान पर हमले के बाद फिर से लूटा. Shuja उद दौला-1774 में फोर्ट नियंत्रित है, तो अंग्रेजी 1801 में पूरे देश का नियंत्रण ले लिया. आमिर खान ने 1805 में उसके पड़ोस में एक विद्रोह का नेतृत्व किया, और अब 1858 में इस समूह बेवफा इतनी के रूप में व्यवहार करने के लिए बाहर का नाम और परिवार के सम्मान पोछ लो.



19 अप्रैल को जानकारी मिली थी कि जलाल उद्दीन खान, महमूद खान के एक भाई है, और अल्लाह Sa'd खान, जो पूर्व में अमरोहा में munsif था कोट कादिर में दोनों थे. कलेक्टर और मेजर इस्माइल कुछ फौजियों साथ ले करने के लिए उन्हें गिरफ्तार किया. इससे पहले कि वे स्थान तक पहुँच सकता है, दो स्वयं को छोड़ दिया करने के लिए मुलतानी सैनिक थे और बेड़ी में खत्म एक यूरोपीय रक्षा करने के लिए बदल गया. उनका कोर्ट मार्शल की 20 वीं पर खोला और, अपराध के सबूत के बाद, जनरल जोन्स आदेश उन्हें गोली मार दी. वे नूरपुर के पास 23 पर मार डाला गया.



3) विद्रोही उड़ घर



यह 20 अप्रैल 1858 पर निर्णय लिया गया था अप करने के लिए उद्दीन खान महमूद खान और जलाल की निवासों झटका है, क्योंकि ये उनके शासन के प्रधानमंत्री showplaces थे, इस प्रकार, इन बेवफा पेंशनभोगी-धोखेबाज के खिलाफ सरकार की अत्यधिक गुस्से को प्रदर्शित किया जा सकता है सभी, और लोगों को पूरी तरह से चेतावनी दी है. आदेश बाहर उसी दिन किया गया. दर्शकों के हॉल, एक बहुत ही विशाल इमारत जो सरकार की अपनी सीट की गई थी, ऊपर उड़ रहा था. यह वही दिन है कि सिखों की कंपनी और मेजर इस्माइल के तहत तोपखाने पार्क पत्थर गढ़ में कप्तान हाउस के तहत सबसे पहले पंजाब स्क्वाड्रन के साथ रहना चाहिए पर निर्णय लिया गया. यह भी निर्णय लिया गया कि श्री जार्ज पामर, संयुक्त मजिस्ट्रेट, जिला के उत्तरी भाग के प्रभारी लेना चाहिए. वह जो अपने बल के साथ स्टेशन पर Najibabad लिया. कलेक्टर ने मुझे आदेश दिया सद्र अमीन के रूप में, संयुक्त मजिस्ट्रेट के साथ रहते हैं और अपने आदेश का पालन करें. मैं बात मानी और अपने आप को अपने आदेश के लिए उपलब्ध कराया.



4) नगीना और रणधीर सिंह की रिलीज पर विद्रोही समूह, नगीना और सरकार की जीत पर लड़ो



विद्रोहियों ने Najibabad से भाग गए नगीना के जरिए Dhampur के पास गया. रास्ते में हालांकि, अहमद अल्लाह खान अपनी बेड़ी से चौधरी रणधीर सिंह ने जारी किया. Puraini के जमींदार की मदद के साथ, चौधरी रणधीर सिंह Najibabad, जहां वह सरकार में शामिल हो गए बल पहुंच गया. नगीना के निवासियों को फिर से अपने शहर को छोड़ दिया करने के लिए दूर चला रहे हैं.



जब दुष्ट Mareh Daranagar में खबर है कि सरकार ने सेना Najibabad लिया था सुना, वह प्रतिरोध की पेशकश निर्धारित की. उन्होंने नगीना में आया, बिजनौर के रास्ते से उसकी पूरी सेना के साथ. वह बिजनौर में हरदयाल जाट को मार डाला और कुछ हिंदू, जिसे वह नगीना के लिए ले लिया गिरफ्तार किया. उन्होंने नगीना के बागानों में trenches खोदा और फौजियों के लिए भेजा अहमद खान अल्लाह कहते हैं. जो मनुष्य था छितरी हुई है, साथ ही विद्रोहियों के जो दूर चला था, उसका फोन करने के लिए प्रतिक्रिया करने के लिए उसके बारे में रैली. सभी विद्रोहियों के इस प्रकार एक साथ आए थे. सूची Mareh खान, काजी इनायत अली, Dalil Gujar सिंह, अहमद अल्लाह खान, शफी अल्लाह खान, हबीब अल्लाह खान, कलान खान और नाथू खान शामिल थे. वे अपने सभी पुरुषों और तोपखाने नगीना में एक साथ अफजल गढ़, किले लाया. महमूद खान नगीना के लिए नहीं आया, उसने Seohara में बजाय एक टुकड़ा तोपखाने और कुछ sowars के साथ रहने लगा.



Najibabad में 20 कलेक्टर जानकारी प्राप्त की रात के दौरान, कि वह जासूस, दुश्मन बैटरी से प्रत्येक के बारे नियुक्त किया था से है, और टुकड़ों की संख्या. मीर अशरफ अली, नगीना, जो नगीना के माहौल में उपस्थित थे के निवासी और अच्छी तरह से सरकार की ओर झुका हुआ है, वे कलेक्टर को स्थिति पर एक विस्तृत रिपोर्ट भेजी बीच में गिने था. यह इन का अर्थ है कि नगीना में पूरी स्थिति को पूरी तरह Najibabad में जाना जाता था द्वारा किया गया.



सेना Najibabad से नगीना पर 21 वीं पर मार्च किया. मार्च के आदेश के रूप में पहले था. जब सैनिकों नगीना, सैपर्स और खनिकों से तीन मील की दूरी के बारे में नहर तटबंध नीचे पेड़ों की शाखाओं में कटौती पहुँचे और उन्हें पुल पार करने के लिए तोपखाने इस्तेमाल पर रखा गया, जबकि राइफल रेजीमेंट तटबंध खत्म हो गया था खुद को पार करने के लिए. दुश्मन के सैनिक अब देखा जा सकता है. करने के लिए तोपखाने तो यह आगे बढ़ने की रक्षा कर सकते हैं कि, छठी Dragoons और दो तोपें सही करने के लिए अलग टुकड़ों है, जबकि मुलतानी सैनिक बाईं ओर के पास गया, और फिर घेरा तोपखाने आगे चले गए.



दुश्मन आग शुरू किया गया. सरकार की तरफ, तोपखाने भी निकाल दिया. छठी राइफल रेजिमेंट और पहले पंजाब रेजिमेंट उन्नत है, जबकि 17 वीं रेजीमेंट के समर्थन में किया गया था. सिख इन्फैंट्री के लिए एक वॉली आग उन्नत. दंग दुश्मन भाग गए. सरकार ने सेना को सही से पहले शुरू हुआ और कप्तान Carradine मुल्तान हार्स के फौजियों के साथ छोड़ दिया करने के लिए बदल गया. दुश्मन पूर्ण भगदड़ में भाग गया था, और सैकड़ों मारे जा रहा था. सब दुश्मन बैटरी और trenches सरकार हाथों में निधन हो गया. छठी राइफल्स और पहले पंजाबी एक भीड़ में एक स्थान पर पांच तोपखाने टुकड़े ले लिया. carabiniers अग्रणी कप्तान बट दुश्मन छोड़ दिया पर चार्ज के बाद दो टुकड़े और एक jezail लिया. सरकार के पक्ष Mareh घर में ही सामने से एक टुकड़ा तोपखाने लिया.



शक्ति जो सही भाग दुश्मन की उनकी खोज में पास के एक बगीचे (Ba'in रूप में) ज्ञात तक पहुँच पार्श्व पर हमला किया था. शहर और कुछ से सशस्त्र पुरुषों फरार विद्रोही वहाँ शरण ले जा रहे थे. इनमें इनायत रसूल, कुख्यात बागी था [हराम-zadah] कमीने, और जनवरी मुहम्मद, अपने दास. या तो वह या उसके नौकर जो कुछ सरकार sowars बगीचा आ रहे थे पर आग खोला. इस आग को उनके छिपने का स्थान दे दिया. बगीचा मर्मज्ञ के बाद, सरकार ने सेना मौके पर 50 से 60 आदमियों को मार डाला; 60-70 पुरुष जो कब्जा कर लिया गया बाद में जीवित बंदूक आग से मार डाला गया. इनायत रसूल और उसके नौकर साथ के साथ मारे गए थे काजी क्वार्टर जो बगीचे में छिपा दिया गया था से पुरुषों के अधिकांश. महिलाओं को जो छुपा से उभरा नहीं molested थे.



कप्तान Carradine के लिए छोड़ दिया हार्स के मुल्तान रेजिमेंट के सैनिक ले लिया है, ताकि चार मील के लिए विद्रोहियों का पीछा. चार छह बंदूकें और हाथी गांव Majhera नीचे Dhampur के लिए सड़क पर ले जाया गया. हाथियों पर सभी लोगों को; मारे गए एक यात्री बच गया. वह श्री Kirani, टेलीग्राफ इंस्पेक्टर, जो महमूद खान के एक कैदी की गई थी. कप्तान Carradine उसे सुरक्षित लाया और सेना को आवाज़.



दुश्मन यकीन है कि सरकार ने सेना को वास्तविक लड़ाई के दिन पर हमले के लिए जा रहा था नहीं किया गया था. इसलिए, Dalil सिंह Gujar, विद्रोही, घोड़े की एक पार्टी के साथ Budhpura गए होने के लिए राशन लेने के लिए और बैंकरों वहाँ लूट के बाद नगीना करने के लिए वापस आ रहा था. जब वह शरीफ-ulMulk-pur गांव पहुंचे, अन्यथा Qaziwala रूप में जाना जाता है, कुछ सरकार ने बंद सेट sowars उससे पीछा. वे अपने तोपखाने टुकड़ा लिया और उड़ान के लिए उनकी पार्टी डाल दिया. इस लड़ाई में 15 पूर्ण गोला बारूद के साथ तोपखाने टुकड़े जब्त किए गए जबकि एक नव निर्मित टुकड़ा है कि फट पड़ा पाया गया था मैदान पर तोड़ दिया.



समय Najibabad की लड़ाई शुरू करने के बारे में था, मेजर Najibabad हाउस की ओर से Budhpura हार्स के अपने रेजिमेंट के साथ गया था, वह उस दिशा में भागने से विद्रोहियों ब्लॉक के उद्देश्य से. यह दुख की बात है कि Dalil सिंह Gujar पहले ही से पहले मेजर सभा द्वारा फिसल गई थी वहाँ पहुँच सकता है. प्रमुख हाउस जंगल, जहां उन्होंने Sa'd अल्लाह खान भर में सिर के बल उड़ान में आया था की खोज की. Sa'd अल्लाह खान नगीना में पुलिस इंस्पेक्टर गया था, लेकिन था के रूप में उनकी पुलिस अधीक्षक विद्रोहियों शामिल हो गए. वह मौके पर ही मारा गया था, एक साथ एक trooper के साथ.



5) नगीना एडमिनिस्ट्रेशन



जैसे ही जीत वहाँ आश्वासन दिया गया था, मजिस्ट्रेट और ब्रिगेड मेजर इंद्र सेन खाकी रेजिमेंट के सैनिकों के साथ नगीना के पास गया. वे उनके साथ सैयद अली Turab Tahsildar लिया मदद करने के लिए शहर प्रशासन. मुख्य सड़कों को अवरुद्ध करने के बाद, वे उचित रूप में शहर में कामयाब रहा था. शहर के तीन सौ पुरुषों, जिनमें से 55 स्थान पर मारे गए थे गिरफ्तार किया गया था बाकी जारी किए गए;. मजिस्ट्रेट को मौलवी मुहम्मद अली, नगीना, के रईस लाने शब्द भेजा एक अच्छी तरह से सरकार के चिंतक. वह सरकार में शामिल होने के शिविर का आदेश दिया गया था, उसके घर को लूट से संरक्षित था जहां तक संभव हो,. शहर के बाकी रात तक लूटा था. सरकार की ओर इस लड़ाई में केवल मामूली नुकसान का अनुभव किया. Regretfully, लेफ्टिनेंट Kasteling इस लड़ाई में बहादुरी से लड़ते मारा गया.



उस रात, कलेक्टर और मजिस्ट्रेट मौलवी कादिर अली Tahsildar नियुक्त करने पर नगीना में अपने पुराने जिम्मेदारी लेने के लिए फिर से, सैयद अली बिजनौर के Turab Tahsildar को नगीना में रहने के लिए भर में तहसील से संबंधित मामलों के प्रभारी ले और पुलिस स्टेशन के आदेश दिया गया था नगीना तहसील के लिए, और पुरुषों उसने सोचा की संख्या किराया की जरूरत थी. अधिकारियों कारगर तरीका सैयद अली Turab Tahsildar प्रशासनिक कार्यभार संभाला इस पर प्रसन्न थे.



6) Dhampur और मुरादाबाद पर सेना मार्च



22 की सुबह पर, सेना नगीना से बाहर चढ़ाई करने के लिए Dhampur में पड़ाव डालना. गांव के जमींदार गंगा Dharpur चौधरी Partab सिंह को सूचना दी कि एक टुकड़ा तोपखाने महमूद खान से संबंधित था सड़क पर अपने Seohara के लिए उड़ान में छोड़ दिया गया है; पुरुषों में यह टुकड़ा लाने सौंपा गया था. यह भी एक ही समय है कि जिले के संपूर्ण विद्रोही समूह के मुरादाबाद की ओर भाग गया था पर खोज की थी. फिरोज शाह बाद मुरादाबाद में गया था, पूरी सेना पर वहाँ 23 मार्च किया. श्री अलेक्जेंडर शेक्सपियर पर नूरपुर, जहां वह सेना से अलग हो पर जिला प्रशासन के लिए जिम्मेदारी ले ली. जनरल जोन्स वह मदद दी थी कलेक्टर के लिए हमारे लिए अपने गहरा आभार व्यक्त किया, खुफिया और राशन और अभियान में अपने निरंतर थकान के बारे में उनकी आपूर्ति के लिए. एक ही समय में, जनरल जोन्स Miranpur पर encamped को Darangar पर किले की रक्षा के लिए नदी पार और बिजनौर दर्ज सेना का आदेश दिया. तदनुसार, सेना के 25 पर नदी को पार किया.



7) बिजनौर में विजयी एंट्री



कलेक्टर जनरल जोन्स से ऊपर सभी तोपखाने टुकड़े जो नगीना में ले लिया गया था लिया. मुरादाबाद के लिए पूरी सेना के प्रस्थान के बावजूद, aforementioned अधिकारी, सबसे बुद्धिमानी और बहादुरी, उसकी सुरक्षित तोपखाने में यह सब ले लिया, 26 अप्रैल को बिजनौर दर्ज करें. आबादी के लिए यह सब देखने के तोपखाने dumbfounded था. श्री जॉर्ज पामर, संयुक्त मजिस्ट्रेट, ऊपर बहुत तेजी क्रम में सेट, Najibabad, Kiratpur, Mandawar, आदि वह पुलिस स्टेशन, तहसील कार्यालयों, और कस्टम पदों सेट में नए प्रशासन, और फिर वह बिजनौर में लौट आए. मैं उसके साथ सवार हुआ और 26 पर सद्र अमीन की अदालत खोला. उसी दिन Miranpur में सेना, कप्तान बाबा और पुलिस स्क्वाड्रन के फौजियों के साथ, बिजनौर साथ प्रवेश किया; मेजर हाउस और मेजर इस्माइल चार 28 पर तोपखाने टुकड़ों के साथ बिजनौर में प्रवेश किया.



अप्रैल श्री अलेक्जेंडर शेक्सपियर और श्री जॉर्ज पामर से पहले खत्म करने की अनुमति नहीं किया था उनके महान प्रयास और नियोजन के माध्यम से पूरे जिले के लिए शांति लाया गया था. पुलिस स्टेशनों, कस्टम, पोस्ट और तहसील कार्यालयों प्रत्येक स्थान पर स्थापित किए गए थे. यह एक नाजुक करने के लिए विद्रोहियों को सज़ा बात थी और एक ही समय में विषयों के लिए संतोष देते हैं. इन दोनों कार्यों को पूरा करने के लिए लाया गया तो expediently कि प्रत्येक व्यक्ति को सरकार के लिए एक भय हर गुजरते पल के साथ उसके दिल में बढ़ने लगा, उसी समय विषयों के संतोष और प्रोत्साहन हासिल करना जारी रखा पर. इस संबंध में, एक करने के लिए जिले के वर्दी पिछले अनुभव पर विचार: जब भी सरकार ने दृढ़ता से शासन किया है, डकैतों की सबसे बल्कि आसपास के पहाड़ों और जंगलों में रहने के व्यापक करने के लिए चुना जाना है. जिले में विद्रोहियों की बड़ी संख्या को देखते हुए लोगों ने सोचा कि जंगल में कई जाने के लिए उनके डकैत गिरोहों नए सिरे से निर्धारित होगी. यह पूरी तरह से हमारे दो प्रमुखों के कौशल की वजह से है कि इन बुराइयों को घटित नहीं किया, और इसके बजाय कि, सभी जो जंगलों में चले गए थे जल्द ही बाहर आया को अपने व्यक्तिगत स्थानों के लिए वापसी. वास्तव में, अप्रैल के अंत से पहले, जंगल के माध्यम से सड़कों सुरक्षित थे, और कोट और लाल द्वार धन के बाजारों में तेज व्यापार देखा गया. इन दोनों अधिकारियों की शानदार दूरदर्शिता बड़े पैमाने पर जिले में प्रशासनिक आदेश के इस सबसे असामान्य और तेजी से फिर से स्थापना के लिए जिम्मेदार था. यह उपयुक्त है कि मैं लंबे जीवन, धन के लिए एक प्रार्थना के साथ इस पुस्तक को समाप्त करना चाहिए, और ये सिर्फ और समझदारी के नेताओं के लिए अच्छी किस्मत.



दौलत-O-फतह-O-जफर इकबाल-O-जह-O-manzalat

Der taza'af बुरा da'im khatam kardam पट्टी du'a

मई जीत और विजय, भाग्य और उंचाई और रैंक

कभी आप के लिए बढ़ाने के लिए, प्रार्थना है





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