Saturday, February 18, 2017

मेरी गली से निकला ,घर तक नहीं आया,..!!!
अच्छा वक़्त भी, रिश्तेदार जैसा निकला....!!
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आज सोचा जिंन्दा हुँ तो घूम लूँ,
मरने के बाद तो भटकना ही है !
नीरज कुमार अग्रवाल की फेसबुक वॉल से