Saturday, May 22, 2010

स्टेट खत्म हुआ खत्म हुई हॉकी स्पर्धा कराने की परंपरा

आलम

स्टेट खत्म हुआ खत्म हुई हॉकी स्पर्धा कराने की परंपरा

स्टेडियम में लगा दिया आम का बगीचा

बिजनौर। आजादी के बाद देश की रियासतें खत्म हुई तो उनकी रिवायतें भी खत्म हो गई। साहनपुर स्टेट द्वारा तीस साल तक कराए गए हाकी के राष्ट्रीय स्तरीय टूर्नामेंट क ो भी विराम लग गया। तीस साल तक जिस स्टेडियम में हॉकी का अखिल भारतीय टूर्नामेंट होता था, आज उसमें आम का बाग खड़ है।

जनपद की साहनपुर स्टेट अकबरकालीन स्टेट है। स्टेट के एक वारिस प्रदेश सरकार के पूर्व राज्यमंत्री कुंवर भारतेंद्र सिंह के अनुसार सन 1602 में साहनपुर स्टेट बनी और आज का मौजूद किला 1603 में बना। हाकी के राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ रहे वर्धमान डिगरी कालेज के प्राचार्य डा. वीके त्यागी कहतें हैं कि रियासतों ने खेलों को बढ़ने में बहुत योगदान दिया। साहनपुर स्टेट द्वारा तो लंबे समय तक राष्ट्रीय स्तर की हाकी प्रतियोगिताएं काराई गईऱ्। कुंवर भारतेंद्र सिंह के अनुसार साहनपुर में 1921 से हाकी की राष्ट्रीय स्तर की स्पर्धाएं शुरू हुई और यह 1952 तक चली। देश की सभी जानी मानी टीमों ने यहां आकर हिस्सा लिया। भारतेंद्र सिंह के चाचा रघुराज सिंह कहते हैं कि स्वयं बाबू केडी सिंह ने भी यहां हुई प्रतियोगिताओं में भाग लिया था। वे कहते है कि राष्ट्रीय हाकी एसोसिएशन के नियम तो यहां लागू होते ही थे, किंतु किसी मामले में स्टेट द्वारा लिया गया निर्णय भी सभी को स्वीकार होता था।

1990 में छपी लाला बहादुर मैमोरियल हाकी टूर्नामेंट की स्मारिका में वरिष्ठ पत्रकार स्वर्गीय राजेंद्र पाल सिंह कश्यप के बिजनौर जनपद की हाकी नाम से छपे लेख में कहा गया है कि सहानपुर स्टेट का अपना हाकी का क्लब होता था। स्टेट के राजा भरत सिंह हाकी के बहुत दीवाने थे। उन्होंने हाकी सिखाने के लिए कोच रखा हुआ था। राजा भरत सिंह स्वयं और उनके तीन बेटे इस कोच से नियमित रूप से हाकी सीखते थे। इसी कारण यहां प्रतिदिन हाकी की प्रेक्टिस होती थी।

इस स्टेट द्वारा जहां हाकी टूर्नामेंट कराए जाते थे, वहीं अन्य स्थानों के टूर्नामेंट में भी स्टेट क्लब की टीम भाग लेने जाती थी। रणजोत सिंह और गंगा सिंह स्टेट की टीम के जाने माने खिलाड़ होते थे।

कुंवर भारतेंद्र सिंह कहते हैं कि हाकी के लिए स्टेट द्वारा शानदार स्टेडियम बनाया गया था। इसी में प्रतियोगिताएं होती थी। स्टेट खत्म होने के बाद 1952 से स्टेट में हाकी स्पर्धाएं बंद हो गई। क्लब खत्म हो गया ।

हॉकी की प्रतियोगिता बंद होने पर स्टेडियम का कोई उपयोग न समझ स्टेट ने स्टेडियम की जगह बाग लगवा दिए। आज यहां आम का शानदार बगीचा है। दर्शकों के बैठकर देखने के लिए बनी पेड़ अब टूट फूट गई है, पर यह अब भी नजर आती है।


यह लेख अमर उजाला में 18 मई 2010 के मेरठ संस्करण में छपा है

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