राजाओं की गौरव गाथा का प्रतीक है क्षत्रिय स्तंभ
वैसे तो इतिहास के पन्नों में मुगल काल के दौरान क्षत्रिय समाज के राजाओं द्वारा अपने धर्म और देश की रक्षा के लिए किए गए त्याग, बलिदान और संघर्ष की गौरव गाथाएं अंकित है जो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा का
मार्ग प्रशस्त कर रही है। इसी कड़ी में धामपुर नूरपुर मार्ग पर स्थित ग्राम मोरना में महाराज मुकुट सिंह शेखावत संस्थान की तीन बीघा भूमि पर 15 जनवरी 2020 मकर संक्रांति के दिन स्थापित क्षत्रिय स्तंभ क्षेत्र के युवाओं को क्षत्रिय समाज के राजाओं की गौरव गाथा से अवगत कराने के लिए एक प्रेरणा पुंज के रूप में कारगर साबित होगा।
महाराज मुकुट सिंह शेखावत संस्थान पर स्थापित यह स्तंभ उन वीरों को श्रद्धांजलि है जिन्होंने सन 1542 में महात्मा श्रवण सिंह को अपमानित करने वाले मुगल शासक बाबर के सेनापति फ़तेउल्लाह खान तुर्क को 8 वर्ष की खोजबीन के बाद मुकुट सिंह शेखावत के नेतृत्व में राजपूताने के 12 राजाओं की सम्मिलित सेना के द्वारा मधी युद्ध में परास्त किया गया था।
वर्तमान में बिजनौर, अमरोहा व ठाकुरद्वारा का क्षेत्र उस समय (मुगल काल)के मधी जिले के अंतर्गत आता था।
इतिहासकारों के अनुसार यह युद्ध मुख्य रूप से नीदढगढ़( नीदडू) व राम गंगा पार सरकड़ा में लड़ा गया था इसके अतिरिक्त छोटी-छोटी लड़ाइयां 7 वर्षों तक चलती रही जिसके द्वारा इस वन क्षेत्र को आततायियों के चंगुल से मुक्त कराया गया था।
इतिहासकारों के अनुसार इस युद्ध में माधव सिंह पुत्र राजा मुकुट सिंह शेखावत, मगन सिंह व सुजान सिंह पुत्र राजा अमरजीत सिंह हांडा, विजय सिंह पौत्र राजा मालदेव सिंह वरूका ने असंख्य वीरों के साथ वीरगति प्राप्त की थी।
इस युद्ध का वर्णन ब्रिटिश गजेटियर मे"Ambitious Jagirdars Fleeing from Other Part of India "एवं खुटैटा कलां (अलवर) के भाटो ने अपने आलेखों में विस्तार पूर्वक किया है।
मुगल सल्तनत में प्रतिवर्ष गंगा स्नान पर गढ़मुक्तेश्वर में कार्तिक मास के महीने में विशाल मेला लगता था जिसमें राजस्थान के राजपूत राजा अपने लाव लश्कर के साथ गंगा स्नान करने के लिए आते थे। इसी समय गांव मधी क्षेत्र में रहने वाले महात्मा श्रवण सिंह भी गंगा स्नान करने जाते थे उन्होंने राजपूत राजाओं से कुछ आतताइयों द्वारा उनको परेशान किए जाने के बारे में जानकारी दी और मदद करने का अनुरोध किया जिस पर उनकी व्यथा सुनकर 12 राजपूत राजाओं ने अपने 12000 सैनिकों के साथ मधी क्षेत्र की ओर प्रस्थान किया। इन राजाओं में मुकुट सिंह शेखावत, राजा मालदेव सिंह बरूका, राजा राम सिंह रजावत, राजा आनंद सिंह कछुवाहा, राजा अमरजीत सिंह हांडा,राजा रणधीर सिंह चौहान, राजा गजानंन देव सिंह देवड़ा, राजा मानधाता चौहान, राजा रामचंद्र गहलोत, राजा गोपीचंद सिंह सिसोदिया, राजा बलभद्र सिंह गौड़, राजा बालचंद सिंह त्रिलोकचंदी बैस आदि शामिल रहे।
इन्होंने ही मुगल शासक बाबर के सेनापति फ़तेउल्लाह खान तुर्क और उसके सैनिकों से युद्ध कर उन्हें परास्त किया और क्षेत्र के लोगों को उनके आतंक से मुक्त कराया।बताया जाता है कि उस समय यह राजा यही के होकर रह गए और इन्होंने क्षेत्र में अलग-अलग गांव की स्थापना की। जो आज भी इतिहास के पन्नों में दर्ज है।
मनोज कात्यायन, धामपुर
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