पौराणिक अर्गलापुरी से नांगल सोती: विकास की दरकार

 पौराणिक  अर्गलापुरी से नांगल सोती: विकास की दरकार        - हरिद्वार का प्राचीन प्रवेश द्वार आजादी के बाद से उपेक्षित        -80 वर्ष बाद गंगा नदी पर पुल निर्माण की आस जगी              -उत्तरी क्षेत्र का कार्तिक पूर्णिमा स्नान का पहला स्थान             बिजनौर। नजीबाबाद विधानसभा का आज का  नांगल सोती पौराणिक अर्गलापुरी  कभी विश्व प्रसिद्ध तीर्थ नगरी हरिद्वार का प्रवेश द्वार हुआ करता था। बिजनौर व नजीबाबाद दिशा से श्रद्धालु पैदल मार्ग से गंगा नदी पार कर ही हरिद्वार व चारधाम के लिए यहीं से होकर आवागमन करते थे। अर्गलापुरी का शाब्दिक अर्थ "सांकल ' व कुंडी है। धार्मिक दृष्टि से "अवरोध  है। जीवन में अवरोध को हटाने के लिए "अरगला स्त्रोत" देवी पूजन में महत्व बताया गया है। बताया जाता है तीर्थ नगरी हरिद्वार व चारधाम जाने के लिए पौराणिक बस्ती अर्गलापुरी की सांकल या कुंडी  …





पौराणिक  अर्गलापुरी से नांगल सोती: विकास की दरकार        - हरिद्वार का प्राचीन प्रवेश द्वार आजादी के बाद से उपेक्षित        -80 वर्ष बाद गंगा नदी पर पुल निर्माण की आस जगी              -उत्तरी क्षेत्र का कार्तिक पूर्णिमा स्नान का पहला स्थान             बिजनौर। नजीबाबाद विधानसभा का आज का  नांगल सोती पौराणिक अर्गलापुरी  कभी विश्व प्रसिद्ध तीर्थ नगरी हरिद्वार का प्रवेश द्वार हुआ करता था। बिजनौर व नजीबाबाद दिशा से श्रद्धालु पैदल मार्ग से गंगा नदी पार कर ही हरिद्वार व चारधाम के लिए यहीं से होकर आवागमन करते थे। अर्गलापुरी का शाब्दिक अर्थ "सांकल ' व कुंडी है। धार्मिक दृष्टि से "अवरोध  है। जीवन में अवरोध को हटाने के लिए "अरगला स्त्रोत" देवी पूजन में महत्व बताया गया है। बताया जाता है तीर्थ नगरी हरिद्वार व चारधाम जाने के लिए पौराणिक बस्ती अर्गलापुरी की सांकल या कुंडी  खोलकर ही प्रवेश किया जाता रहा है। अर्गलापुरी में शुक्ल समाज की बहुतायत के चलते पहले शुक्लों वाली नांगल ,नांगल स्रोती व वर्तमान में नांगल सोती कहलाने लगी।  तीर्थ नगरी व चारधाम जाने आने का प्रवेश द्वार व उत्तरी क्षेत्र का पहला स्थान जहां गंगा नदी किनारे रेंत पर कार्तिक पूर्णिमा का स्नान व मेला होता था। जहां दर्जनों प्राचीन मंदिरों से वातावरण आस्था व भक्ति का रहता था वह आजादी के बाद विकास में पिछड़ गया। नजीबाबाद व बिजनौर से मंडावली व भागू वाला होकर हरिद्वार तक मार्ग बनने से अर्गलापुरी अपनी धार्मिक ऐतिहासिक सांस्कृतिक पहचान खो चुका है। महाभारत काल में कौरव पांडव के युद्ध का साक्षी व स्वतंत्रता आंदोलन की शरणस्थली व साहनपुर रियासत की आरामगाह के रूप में पहचान बना चुका आज का नांगल सोती जरूरत के विकास से कोसों दूर है। क्षेत्र से चुने जनप्रतिनिधियों,जिला प्रशासन ने कभी धार्मिक ऐतिहासिक सांस्कृतिक बस्ती को विकास के मार्ग पर ले जाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। आजादी के आठ दशक बाद भी नांगल सोती मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। हरिद्वार से बहती आई गंगा नदी के मुहाने पर ऊंचे स्थान पर बसे नांगल सोती की आबादी 15 हजार है। जबकि इससे सटी 5-5 हजार आबादी वाली दो और ग्राम पंचायत  जीतपुर खास व शहजादपुर है। बिजनौर - हरिद्वार मार्ग पर गंगा के पूर्व में नजीबाबाद विधानसभा का अंतिम गांव है। एक दिशा में  गांव स्थित होने से आज तक उपेक्षाओं का दंश झेल रहा है। जिससे आज भी जरूरत का विकास आज तक नहीं हो पाया है। गंगा एक्सप्रेस वे व लक्सर- नजीबाबाद पुल व मार्ग निर्माण की घोषणा से विकास की कुछ आस जगी है। उत्तर प्रदेश सरकार तीस वर्ष से गंगा नदी पर पुल निर्माण को अनदेखा करती रही तो उत्तराखंड सरकार ने पुल निर्माण की घोषणा कर गंगा खादर के विकास को पंख दिए हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गंगा एक्सप्रेस वे को अमरोहा से बिजनौर होकर हरिद्वार तक गंगा नदी के समानांतर निकालने की घोषणा से अब कुछ उम्मीद जगी है। गंगा नदी पर पुल निर्माण होने से विकास की संभावना के सपने को कब तक पूरा किया जाता है यह उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड सरकार पर निर्भर है। यदि गंगा नदी पर पुल निर्माण होने व गंगा एक्सप्रेस वे को नांगल सोती से रामपुर रायघटी से निकाला कर हरिद्वार ले जाया जाता है तो नजीबाबाद से लक्सर, रूड़की व हरिद्वार के लिए सड़क ही नहीं विकास की राह मिलेगी। किसान, मजदूर, युवाओं को रोजगार मिलेगा व पर्यटन व धार्मिक विकास को गति मिलेगी।                        ---------------------------------------- हरिद्वार व चारधाम आवागमन  मार्ग अब गुजरे जमाने की बात -------------------------------------  बस्ती के बुजुर्ग बताते आए हैं कुमायूं, रूहेलखंड व बिजनौर क्षेत्र के श्रद्धालु चारधाम आवागमन हेतु अर्गलापुरी से पैदल गंगा नदी पार कर जंगल के रास्तों से गुजरते थे तब नजीबाबाद व अर्गलापुरी में मंदिरों में उनका ठहराव  होता था दिन या रात के  विश्राम के बाद ही मंजिल को पाते थे। लेकिन पक्के सड़क व रेल वाहन सुविधा होने से दोनों धर्म स्थल से श्रद्धालु विमुख हो गये। तीर्थ स्थल हरिद्वार का प्रवेश द्वार अर्गलापुरी भी समय के साथ अदृश्य हो गयी है। बताते हैं चक्रवर्ती सम्राट राजा मोरध्वज के कार्यकाल में क्षेत्र में शिव मंदिर बहुतायत से बने थे।भूमि की जुताई में प्राचीन स्वयं भू शिवलिंग मिलें तो मंदिर स्थापित किए गये । गंगा नदी के निकट गंगा मंदिर,जाने के सामने शिव मंदिर ,काजी हाऊस के पीछे शिव मंदिर प्राचीन है । शीतला माता मंदिर पर तो साहनपुर रियासत के बच्चों के मुंडल होते चले आएं हैं।  आज भी दर्जनों प्राचीन, पौराणिक मंदिर आज भी अर्गलापुरी की एक पहचान है।                           ----------------------------------------  साहनपुर रियासत का प्रमुख विश्रामालय रहा नांगल सोती -------------------------------------- बिजनौर जनपद की प्रमुख रियासत साहनपुर का विशाल क्षेत्र हरिद्वार तक फैला हुआ था।  साहनपुर रियासत के राजाओं को शिकार खेलने का शौक था। देशी विदेशी शिकारी साहनपुर रियासत के मेहमान हुआ करते थे। बताते हैं शिकार के बाद सभी  गंगा नदी के जंगल से सटे नांगल सोती के आरामगृह में विश्राम करते थे। बिजनौर के अंतिम गांव सबलगढ में भी राजा सबल सिंह का किला लंबे समय तक आतिथ्य के लिए जाना गया। नांगल सोती में रियासत का आरामगृह में आज 1952 से राजा भरत सिंह के नाम से इंटर कालेज संचालित है।                                   ---------------------------------------- सुल्ताना डाकू के समय नांगल सोती में बना ब्रिटिश थाना -------------------------------------- ब्रिटिश काल में जब बिजनौर जनपद में कुख्यात सुल्ताना डाकू का दौर चल रहा था तब 19 वी सदी में नांगल सोती में पश्चिमी दिशा में थाना स्थापित किया गया था। अब का नजीबाबाद व श्यामपुर (हरिद्वार) थाने नांगल थाने की चौकी हुआ करते थे। सुल्ताना डाकू के दौर में ही 1924 में नांगल थाने का भवन निर्मित किया गया। बताते हैं सुल्ताना डाकू ने 20 मई 1922 को  नांगल थाने के गांव जालपुर से जमींदार सिब्बा सिंह
 के ऐलानिया आखिरी डकैती डाली थी। जिनके मुख्य दरवाजे पर आज भी गोलियों के निशान हैं।                                      --------------------------------------- देश की आजादी में भी नांगल सोती की मिट्टी का रहा योगदान ---------------------------------------- ब्रिटिश शासन के विरूद्ध उठी आवाज़ व आजादी की लडाई में  यहां की मिट्टी का बड़ा योगदान है। क्रांतिकारी अपने आंदोलन के दौरान गंगा खादर के बीहड़ में आश्रय लेकर ही ब्रिटिश शासन के विरूद्ध रणनीति अपनाते थे। नांगल सोती के गोपीनाथ अग्रवाल एक मातृ आंदोलनकारी रहें जबकि मूलचंद महाशय,मुकंदी सिंह,  चौधरी सुक्खन सिंह, मुरली सिंह सहित दर्जनों क्षेत्र के नौजवानों ने देश की आजादी के लिए संघर्ष कर देश को आजादी दिलाई।  
---------------------------------------साहनपुर रियासत ने शिक्षा को स्थापित कराया कालेज --------------------------------------- आजादी के बाद संविधान लागू होने पर रियासत व जमींदारी खत्म होने के बाद शिक्षाविद् सक्टूमल आर्य की प्रेरणा पर राजा चरत सिंह ने अपने पिता राजा भारत सिंह के नाम पर शिक्षालय खोलने के लिए नांगल सोती का भव्य विश्रामालय (गढ़ी )खेती की जमींन दान कर दी थी। आज यह विद्यालय जनपद के ग्रामीण क्षेत्र का प्रमुख विद्यालय है।                ----------------------------------------  हरिद्वार नया मार्ग बना तो  नांगल सोती का विकास रूका ---------------------------------------- पौराणिक ऐतिहासिक धार्मिक महाभारत कालीन बस्ती का आजादी के बाद जरुरत का विकास नहीं हुआ। हरिद्वार के लिए मंडावली व भागूंवाला होकर नया मार्ग बनने से नांगल सोती हाशिये पर आ गया। प्राइमरी, जूनियर, इंटर कालेज,दो बैंक,डाकघर,साधन सहकारी समिति पुलिस थाना,पशु चिकित्सालय, प्राथमिक हैल्थ सैंटर आदि संचालित है लेकिन आज तक गैस एजेंसी, पैट्रोल पंप,बस स्टेशन, गंगा नदी पर पुल,विकास खंड,नगर पंचायत दर्जा हासिल नहीं हो सका। जनप्रतिनिधियों,जिला प्रशासन ने सदा ही यहां के नागरिकों को निराश ही किया है।               ---------------------------------------- गुड़ उत्पादन में नांगल सोती की बनी राष्ट्रीय पहचान                 ---------------------------------------- गन्ना बाहुल्य क्षेत्र होने के कारण नांगल सोती गुड़ के लिए उभरता हुआ बाजार बना है। तीन दर्जन से अधिक पावर कोल्हू पर निर्मित गुड व शक्कर बिजनौर, उत्तर प्रदेश ही नहीं उत्तराखंड, गुज़रात, राजस्थान तक सप्लाई होता है। सर्दी के सीजन में बनने वाला लड्डू व अदंरखी (बर्फी) अपने स्वाद , गुणवत्ता के लिए जानी जाती है।  रिश्तेदारों व अधिकारियों को भेंट करने के लिए गुड के पैकेट यहां से ही भिजवाएं जाते हैं। बिना मसाला व रंग और मेवा युक्त गुड़,जैविक गन्ने का गुड़ यहां की पहचान है। यहां गंगा खादर में उगने वाली सब्जी,फल व पटेरे का कारोबार प्रमुख रोजगार है।                       ----------------------------------------गंगा नदी पर पुल निर्माण,नये मार्ग से खुलेगी किस्मत       -------------------------------------- तीन दशक से क्षेत्र के नागरिक गंगा नदी पर पुल निर्माण की मांग करते आ रहे हैं। डीएम से सीएम,विधायक से सांसद,मंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक आवाज उठाई लेकिन किसी ने नहीं सुना। सपा सरकार में पुल निर्माण का सर्वे हुआ तो एक उम्मीद जगी लेकिन बिजनौर उप चुनाव में राजनीतिक लाभ के लिए पुल बालावाली बना दिया गया। भाजपा की डबल इंजन सरकार तक आवाज उठाई। उत्तर प्रदेश सरकार ने निराश किया तो उत्तराखंड सरकार ने लक्सर व नजीबाबाद विधानसभा को जोड़ने के लिए रामपुर रायघटी के निकट पुल निर्माण की घोषणा की। उधर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गंगा एक्सप्रेस वे को बिजनौर की धरती से होकर गंगा नदी के समानांतर हरिद्वार तक निकालने की घोषणा से एक विश्वास की किरण चमकी है। रामपुर रायघटी के खसरा 291 को केन्द्र मानकर यूपीडा व उत्तराखंड सरकार नांगल सोती के आसपास पुल उतारकर लक्सर को नजीबाबाद से व अमरोहा, बिजनौर को हरिद्वार से जोड़ने से नांगल सोती के विकास को पंख लगने की संभावना बनी है। यदि यह पुल व मार्ग बनते हैं तो गंगा खादर का विकास, पर्यटन व रोजगार को बढ़ावा मिलेगा और महाभारतकालीन पौराणिक ऐतिहासिक धार्मिक सांस्कृतिक बस्ती अर्गलापुरी का उसका खोया हुआ अस्तित्व लौटाया जा सकेगा।                           ----------------------------------------नांगल‌-सोती को मिले नगर पंचायत का दर्जा व ब्लाक --------------------------------------- नांगल सोती को  नगर पंचायत बनाने की मांग  वर्षों से उठती रही है लेकिन मांग पूरा होना तो दूर आश्वासन भी नहीं मिला । नांगल सोती ,जीतपुर शहजादपुर हरचंदपुर मायापुरी आदि ग्राम पंचायत को जोड़कर नांगल सोती को नगर पंचायत का दर्जा देने व नांगल सोती को विकास खंड बनाने, रोडवेज बस स्टैंड व प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र का उच्चीकरण,राजकीय महाविद्यालय, तकनीकी कालेज,व कोई उद्योग स्थापित किया जाना इस क्षेत्र के विकास के लिए आवश्यक ही नहीं जरूरी है।                             + मुकेश सिन्हा

नोट − नांगल थाना1907 से पहले का है।1907 के गजेटियर में तृतीय श्रेणी के थानों में नांगल का  नाम है



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