बिजनौर में कबड्डी-कुशल पाल सिंह
इस दस्तावेज़ के आधार पर बिजनौर में कबड्डी के इतिहास, प्रमुख खिलाड़ियों, महत्वपूर्ण प्रतियोगिताओं और जिला कबड्डी संघ के उतार-चढ़ाव की पूरी कहानी नीचे दी गई है:
बिजनौर में कबड्डी की शुरुआत और शुरुआती दौर
- भौगोलिक संबंध: गंगा नदी के किनारे बसे बिजनौर जिले का कबड्डी खेल से बेहद गहरा नाता रहा है।
- शुरुआती स्वरूप: शुरुआत में इस खेल के लिए किसी विशेष सामग्री की जरूरत नहीं होती थी; जमीन पर पाला (लाइन) खींचकर खिलाड़ी दो हिस्सों में बंटकर खेल शुरू कर देते थे।
- स्थानीय आयोजन: आरम्भ में यह खेल ग्रामीण मेलों, तीज-त्योहारों, गांवों और कस्बों में स्थानीय स्तर पर खेला जाता था। धीरे-धीरे इसने प्रतियोगिता का रूप ले लिया, जहाँ एक गांव या कस्बे की टीम दूसरे स्थान की टीम से मुकाबला करती थी।
- चांदपुर का विशेष स्थान: जिले की कबड्डी में चांदपुर का हमेशा से विशेष स्थान रहा। इसके पास स्थित ईस्माइलपुर गांव के पुराने प्रसिद्ध खिलाड़ियों में स्वर्गीय भारत सिंह, स्वर्गीय जोरावर सिंह, स्वर्गीय हरपाल सिंह, स्वर्गीय रोहताश सिंह, स्वर्गीय गुलाब सिंह और स्वर्गीय जमीर मियां शामिल थे, जिनकी धूम पूरे जिले में थी।
आजादी के बाद का सफर और 1953 की ऐतिहासिक जीत
- प्रतियोगिताओं का विस्तार: आजादी के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में खेलों को बढ़ावा देने के लिए ब्लॉक स्तर पर प्रतियोगिताएं शुरू हुईं। ब्लॉक से चुने गए खिलाड़ी जनपद (जिला) स्तर पर, फिर राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर जाकर जिले का नाम रोशन करने लगे।
- 1953 की ऐतिहासिक जीत: पूर्व विधायक स्वर्गीय चौधरी धर्मवीर सिंह के मार्गदर्शन में ईस्माइलपुर की टीम ने कई प्रतियोगिताएं जीतीं। इसी क्रम में 1953 में लखनऊ में पीआरडी (PRD) द्वारा आयोजित प्रतियोगिता में इस टीम ने बिजनौर का प्रतिनिधित्व करते हुए पूरे उत्तर प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया।
- विजेता टीम के खिलाड़ी: इस ऐतिहासिक टीम को तत्कालीन मुख्यमंत्री स्वर्गीय गोविंद बल्लभ पंत द्वारा पुरस्कृत किया गया था। टीम में मंगू सिंह (कप्तान), छोटे सिंह, देवराज सिंह, कोमन सिंह (सभी ईस्माइलपुर से) के अलावा ओमप्रकाश खन्ना (बिजनौर), रोहताश सिंह (मिलक), स्वर्गीय कृष्णा वर्मा (चांदपुर), स्वर्गीय विक्रम सिंह (बागड़पुर) और सुरेश शर्मा (बिजनौर) शामिल थे।
जिला कबड्डी संघ का गठन और उतार-चढ़ाव
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प्रथम गठन (1977): उत्तर प्रदेश में कबड्डी एसोसिएशन का गठन 1972-73 में हुआ था, जिसके बाद बिजनौर में पहली बार 1977 में जिला कबड्डी संघ का गठन किया गया। इसके प्रथम पदाधिकारी निम्नलिखित थे:
- अध्यक्ष: श्री विजय कुमार गुप्ता (चुनीन बाबू)
- सचिव: स्वर्गीय जगदीश यादव
- कोषाध्यक्ष: श्री रामौतार बंसल
बंसल
- सबसे भव्य आयोजन (1977): इस संघ के माध्यम से 1977 में ही हिंदू इंटर कॉलेज, चांदपुर में उत्तर प्रदेश राज्य सीनियर कबड्डी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जो जिले के इतिहास का सबसे सफल और भव्य आयोजन माना जाता है। इसके बाद नियमों के तहत जिले में पुरुष और महिला वर्ग की कई अनौपचारिक राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताएं भी हुईं, जिनमें दिल्ली पुलिस, हरियाणा, राजस्थान, हैदराबाद, बिहार और महाराष्ट्र जैसी टीमें शामिल हुईं।
- संघ का निष्क्रिय होना (1978): साल 1978 के बाद किन्हीं कारणों से यह जिला संघ निष्क्रिय हो गया, जिससे स्थानीय खिलाड़ियों को आगे बढ़ने के अवसर कम हो गए।
- पुनर्गठन की वजह और वापसी (1997): साल 1994 में लखनऊ के चौक स्टेडियम में जूनियर नेशनल के लिए बिजनौर के तीन खिलाड़ियों—अरविंद कुमार, कुलदीप कुमार और प्रदीप का चयन कलकत्ता (कोलकाता) नेशनल के लिए हुआ था। लेकिन बिजनौर में आधिकारिक संघ/यूनिट न होने के कारण इन तीनों खिलाड़ियों को वापस भेज दिया गया। इस घटना के बाद, 1997 में खिलाड़ी अरविंद सिंह (बागड़पुर), खड़ग सिंह (मण्डावली) और सुनील कुमार (मौज्जमपुर—जिन्हें अध्यक्ष बनाया गया) के प्रयासों से संघ का पुनर्गठन हुआ और इसे दोबारा मान्यता मिली।
वर्ष 2000 के बाद के बड़े आयोजन
दस्तावेज़ के अनुसार, पुनर्गठन के बाद बिजनौर में कई बड़ी राज्य स्तरीय चैंपियनशिप आयोजित की गईं:
- 2001: ग्राम बागड़पुर (चांदपुर) में '28वीं राज्य सीनियर पुरुष कबड्डी प्रतियोगिता' का भव्य आयोजन हुआ।
- 2002: गुलाब सिंह डिग्री कॉलेज (चांदपुर) में '28वीं राज्य सीनियर महिला प्रतियोगिता' आयोजित हुई, जिसमें भारी भीड़ उमड़ी और तत्कालीन जिलाधिकारी श्रीमती लीना जौहरी भी दर्शकों की संख्या देखकर हैरान रह गईं।
- 2005: मण्डावली में बालिका वर्ग की प्रदेशीय कबड्डी चैम्पियनशिप का सफल आयोजन हुआ।
- 2012: नेहरू स्पोर्ट्स स्टेडियम, बिजनौर में जिला कबड्डी एसोसिएशन और उत्तर प्रदेश सरकार के समन्वय से प्रदेशीय प्रतियोगिता कराई गई।
इन आयोजनों में द्रोणाचार्य अवार्डी बलवान सिंह, रामवीर खोखर, डॉ. सुनील डबास (पद्मश्री) और अर्जुन अवार्डी राम मेहर सिंह व संजीव बालियान जैसी बड़ी खेल हस्तियों ने शिरकत की。
बिजनौर के चमकते सितारे (राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी)
साल 2000 के बाद बिजनौर के खिलाड़ियों ने वैश्विक और राष्ट्रीय पटल पर अमिट छाप छोड़ी है:
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर:
- राहुल चौधरी: बिजनौर की कबड्डी का सबसे बड़ा नाम, जिन्हें प्रो-कबड्डी (Pro Kabaddi) के 'पोस्टर बॉय' के रूप में जाना जाता है। उन्होंने विश्व कप में स्वर्ण पदक (गोल्ड मेडल) के साथ एशियाई खेलों में भी पदक जीते हैं।
- नेहा दक्ष: भारतीय महिला कबड्डी टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए एशियन चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीता। वर्तमान में भी वे जिले की प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी हैं。
- सुधीर (NIS कोच): इन्होंने कोचिंग और ऑफिशियल के रूप में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।
राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख खिलाड़ी और कोच:
- अखिलेश कुमार उर्फ पारूल चौधरी: खिलाड़ी और कोच दोनों रूपों में प्रसिद्ध। वर्तमान में यह I.T.B.P. (भारत-तिब्बत सीमा पुलिस) में मुख्य कोच की भूमिका निभा रहे हैं।
- मो० अमान (गांव ढाकी, चांदपुर): वर्तमान परिदृश्य में राष्ट्रीय स्तर पर एक बेहतरीन 'बेस्ट लेफ्ट कॉर्नर' खिलाड़ी के रूप में उभर रहे हैं।
- विकुल लाम्बा (गाँव बाबरपुर): राष्ट्रीय स्तर के हर फॉर्मेट में जिले का नाम कमाया है।
- शिवम चौधरी (पाजी) और सुशांत कुमार: वर्तमान में कबड्डी की दुनिया के दो बड़े नाम हैं।
रोज़गार और खेल में आगे बढ़ता बागड़पुर गांव:
बिजनौर में कबड्डी के खेल के दम पर सबसे ज्यादा सरकारी नौकरी (रोजगार) पाने वाले खिलाड़ी बागड़पुर गांव से हैं। इनमें रोहित चौधरी (उ०प्र० पुलिस), शिवम कुमार, विषभ चौधरी, रिषभ चौधरी (सभी सी०आर०पी०एफ०), विवेक लाम्बा, रोहित कुमार और राहुल कुमार (भारतीय सेना) प्रमुख हैं।
नए उभरते खिलाड़ी (युवा प्रतिभाएं)
जिले में कबड्डी की नई पौध भी बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है:
- युवा छात्र/पुरुष खिलाड़ी: आयुष कुमार, लक्की, सन्नी चौधरी, अंकुश सिंह, अंश चौधरी, आर्यन तातरान, पंकज कुमार, रितिक, अनुभव, शगुन धनकड़, अनमोल, समीर, नवाजिश, जागेश, अरुण, विशाल, अतुल, प्रदीप गंगवाल, निशांत और विकास।
- महिला खिलाड़ी: रानी चौधरी, प्रिया सिंह, शीतल चौधरी, शिवानी चौधरी, तरनजीत कौर, रेणु सिंह, सीमा चौधरी, आरजू मलिक, निशा चौधरी, पारूल चौधरी, शीतल चौधरी (मण्डावली), उजाली राणा, सदब खान, पूजा चौधरी, सपना चौधरी, पूर्णिमा चौधरी, टीना, आकांशी जटोला, सीमा, पूजा, भूमिका, रिमझिम, वंशिका राजपूत, पल्लवी, अर्चना, अविका, भव्या, परि सैनी और गौरी पंडित।
- -कुशल पाल सिंह
- एडवोकेट
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