बिजनौर पर कर्मवीर सिंह की कविता
*बिजनौर की महिमा*
आओ भाई तुम्हें बतायें महिमा ये बिजनौर की।
नमन करो इसकी माटी को कहता हूँ जिस ठौर की॥
ये मेरा बिजनौर, जय-जय-जय बिजनौर॥
उत्तर में हिमगिरि की छाया पश्चिम में गंगा बहती।
मालिनी इसके वक्षस्थल को सिंचित हरा भरा करती।
शकुन्तला दुष्यन्त की गाथा भी इसकी माटी कहती।
राजा भरत के नामकरण से भारत को गर्वित करती।
यहाँ आश्रम कण्व ऋषि का बातें हैं सिरमौर की।
शाकुन्तल भी लिखा गया यहाँ बात बड़े ही गौर की॥
जय-जय बिजनौर, ये मेरा बिजनौर॥
आओ भाई तुम्हें बतायें ---
विदुर नीति के महा प्रणेता विदुर कुटी को याद करो।
विदुर संग साग बथुवे का श्रीकृष्ण को याद करो।
सिद्ध पीठ मोटा महादेवा रानी सती को याद करो।
मोरध्वज का किला यहाँ मथुरापुर मोर को याद करो।
शिब्बासिंह का यहाँ जालपुर बात मेरे ही ठौर की।
साहनपुर के किले में यादें भरत सिंह सिरमौर की॥
जय-जय बिजनौर, ये मेरा बिजनौर॥
आओ भाई तुम्हें बतायें ---
अंग्रेजी में बिजनौर शब्द को क्रम से लिखा पढ़ा जाता।
दुनिया में कोई जगह नहीं जो इसकी तुलना कर पाता।
यू० पी० में गंगा का मेला शुरु यहीं से हो जाता।
बनकर बिजली कालागढ़ से भारत रोशन हो जाता।
राजपुर नवादा दुष्यन्त की धरती गजलों के सिरमौर की।
यहाँ रियासत चौहानों की बहुत बड़ी हल्दौर की।
जय-जय बिजनौर, ये मेरा बिजनौर।
आओ भाई तुम्हें बतायें --
*विजनौर की महिमा भाग १*
आओ भाई तुम्हें बतायें महिमा ये बिजनौर की।
नमन करो इसकी माटी को कहता हूँ जिस ठौर की।।
जय-जय-जय बिजनौर ये मेरा बिजनौर।।
आओ भाई तुम्हें बतायें...
राजा का ताजपुर में गिरजाघर जिले में ऐसा कोई नहीं।
गजेन्द्रनाथ रिक्ख जहाज हवाई ऐसी रियासत कोई नहीं।
शुगर मिल जो सिवहारा की जिले में पहले कोई नहीं।
अपर गैन्जेज जो नाम दिया था बिरला जैसा कोई नहीं।
अवध नाम से चली आज ये सोहरत चारों ठौर की।
सिवहारा भी धन्य हो गया बात बड़े ही गौर की।।
जय-जय-जय बिजनौर ये मेरा बिजनौर।
आओ भाई तुम्हें बतायें...
नजीबाबाद में नजीबुद्दौला किला बना कर चले गये।
महावतपुर में पत्थरगढ़ का नाम बता कर चले गये।
सैंदवार को सेना के द्वार का नाम दिलाकर चले गये।
जोगी रमपुरी में नजफे हिन्द दरगाह बना कर चले गये।
एम. एल. ए. की सीट आठवीं बनी यहाँ नेहटौर की।
बालावाली पहला पुल है जो गरिमा बिजनौर की।
जय-जय-जय बिजनौर ये मेरा बिजनौर।।
आओ भाई तुम्हें बतायें...
पच्चीस स्टेशन रेलमार्ग के जिला दूसरा मिला नहीं।
चारों नगर निगम की छाया मिलती है हर हाल यहीं।
रुक्मिणी कृष्ण की प्रेम कहानी कुन्दनपुर का किला यहीं।
गेट वे आफ गढ़वाल यहाँ पर किसी को शिकवा गिला नहीं।
कवि शायरों की भूमि ये आज भी है उस दौर की।
मैं नतमस्तक करता हूँ मेरी माटी को बिजनौर की।।
जय-जय-जय बिजनौर ये मेरा बिजनौर।।
आओ भाई तुम्हें बतायें...
कर्मवीर सिंह जालपुर बिजनौर



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