Thursday, April 15, 2010

बिजनौर से लुप्त हो गया भेड़िया

जंगलों का कटना रहा सबसे बड़ कारण



बिजनौर। दो दशक पहले जिले के हर गांव में आए दिन भेड़िया आने का शोर मचता था। भेड़िया किसी न किसी बच्चे को उठाकर ले जाता था, लेकिन अब भेड़िया बिजनौर जनपद से लुप्त हो गया है। वन विभाग इसका कारण बढ़ते शोरगुल को मानता है।

बिजनौर जनपद के लोगों के लिए भेड़िया अब कहानियों में ही रह गया है। गांवों में बुजुर्ग अपने बच्चों को भेड़िये की कहानियां ही सुनाते है। दो दशक पहले तक जनपद में किसी न किसी गांव में भेड़िया आया ,भेड़िया आया का खूब शोर मचता था। लोग भेड़िये से अपने बच्चे की हिफाजत करने को रात जागकर काटते थे। फिर भी कही न कही से भेड़िया छोटे बच्चों को उठाकर ले ही जाता था। मगर भेड़ये आने की घटनाएं दो दशक पहले की ही हैं। कोतवाली शहर के गांव सालमाबाद भरेरा निवासी शौपाल सिंह कहते है उनकी याद में करीब 38 साल पहले गांव में भेड़िया आया था, जो उनकी छोटी बहन को उठाकर ले गया था। उसके बाद से आज तक गांव में तो क्या जनपद में दूर दूर तक भेड़िया आने की बात नहीं सुनी। वे मानते है कि पहले बहुत जंगल थे। जंगल खत्म होने से यह जानवर जनपद से लुप्त हो गया है।

उप प्रभागीय वनाधिकारी सीपीएस मलिक कहते है कि अमानगढ़, धामपुर, नगीना रेंज में भेड़िया नहीं पाया गया है। यहां पर पिछले काफी समय से भेड़िया नहीं है। वहीं उप प्रभागीय वनाधिकारी महेश चंद कहते है कि बिजनौर, चांदपुर, नजीबाबाद क्षेत्र में भी पिछले कई वर्षों से भेड़िया नहीं देखा गया है और न ही उसके होने की कोई जानकारी मिली है। वन विभाग का मानना है कि यह जानवर घने जंगलों में रहता है। धीरे धीरे जंगल खत्म हो गए है और वाहनों व फैक्ट्रियों का शोरगुल भी बहुत बढ़ गया है। इसलिए भेड़िया बिजनौर के जंगलों में नहीं मिलता है। यह बहुत समय पहले ही लुप्त हो चुका है।

कई वर्षों पहले जनपद से लुप्त हो चुका है भेड़िया

बिजनौर। डीएफओ एच राजा मोहन कहते है कि भेड़िया पिछली कई गणनाओं में बिजनौर जनपद के जंगलों में नहीं पाया गया है और न ही इसके कहीं पर दिखाई देने की सूचनाएं मिली है। वर्षों पहले ही बिजनौर जनपद से लुप्त हो चुका है।
 
रजनीश त्यागी
अमर उजाला मेरठ में 15 अर्पैल के अंक में प्रकाशित समाचार

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