सिख धर्म संस्थापक व प्रथम गुरु के कदम पड़े थे नजीबाबाद
: फोटो 1- गुरु नानक देव जी 2-नजीबाबाद का ऐतिहासिक गुरुद्वारा 3- गुरुद्वारा में स्थित गुरु गद्दी दरबार 4- गुरुद्वारा के नये भवन का ले आऊट
[ -देश की आजादी के बाद बना था श्री गुरुद्वारा नानक शाही - भव्य व आकर्षक गुरुद्वारा भवन में मिलेगी जरूरी सुविधा बिजनौर। ईश्वर एक है, समानता, भाईचारे व मिल बांटकर खाने का सिद्धांत मानने वाले सिक्ख धर्म के पहले गुरू नानक देव के पवित्र पांव जिस जमीन पर पड़े वहां पर गुरु गद्दी स्थापित कर बनाए गये गुरुद्वारे को अब आधुनिक सुविधाओं से परिपूर्ण नया भवन मिलने जा रहा है। नजीबाबाद के इस ऐतिहासिक, धार्मिक गुरूद्वारे पर अब 3-4 करोड़ रूपया व्यय कर अधिक भव्य बनाया जा रहा है। यह भवन दो तीन वर्ष में बनकर तैयार होगा।
मान्यता है सिख धर्म के संस्थापक व प्रथम गुरु नानक देव जी ने समाज में सुधार लाने,आपसी सद्भाव बढ़ाने , सिक्ख धर्म का प्रचार प्रसार करने को भारत भ्रमण के दौरान वर्ष 1565 में नानकमत्ता से हरिद्वार आते समय काशीपुर, कोटद्वार के बाद एक दिन नजीबाबाद में मुख्य मार्ग पर स्थित एक कुटिया में विश्राम किया था । जिस स्थान पर उनके पवित्र पांव पड़े । आजादी के बाद पाकिस्तान से आएं सिख धर्म के अनुयायी परिवारों ने 1947 में श्री गुरुद्वारा नानक शाही का निर्माण कराया था। अब गुरुद्वारा प्रबंधन ने उसी स्थान पर भव्य, आकर्षक विशाल आधुनिक सुविधाओं से लैस नया भवन बनाने का बीड़ा उठाया है। इस पर 3-4 करोड़ का व्यय होने का अनुमान है। सूत्रों के अनुसार गुरूद्वारा में नीचे बड़ा लंगर हाल, रसोई, बाथरूम, सेवादार आवास,पार्किंग ,प्रथम मंजिल पर दरबार शाही ,,80 फुट ऊंचा गुम्बद ,रसोई , विवाह हाल व दो दर्जन दुकानों का निर्माण कराया जाएगा। नजीबाबाद नगर में गुरु नानक देव जी जिस स्थान पर विश्राम के लिए रूके थे वह जीवन दास सहगल की बगिया थी। जिसमें अमरूद के पेड़ों के बीच एक झोपड़ी पड़ी थी जिसमें एक साधु व्यक्ति रहता था । किदवंती है दोपहर को जब गुरु नानक देव को प्यास लगी तब पीने के पानी की समस्या आई थी बताते गुरु नानक देव ने बताया उस कौने में खुदाई करो पानी निकलेगा खुदाई की तो जमीन से पानी आ गया । वहां एक कुइयां का निर्माण कराया गया। वर्तमान में पौराणिक कुइयां गुरुद्वारा भवन बनने के बाद से बंद है। गुरूद्वारा प्रबंधन अब ऐतिहासिक, पौराणिक महत्व की उस कुइयां को खोज कर पुनर्जीवित करने का प्रयास कर रहा है। गुरु नानक देव कुटिया से विदा लेते समय अपना चोला इसी स्थान पर छोड़ गये थे। बताते हैं बाग स्वामी जीवन दास सहगल
बेऔलाद थे। नानक देव की सेवा में लगे जीवन दास सहगल को गुरु नानक देव का आशीर्वाद मिला तो उसी वर्ष उनको पुत्र रत्न प्राप्त हुआ। इसके अलावा यहां बताते हैं जीवन दास सहगल ने गुरू नानक देव के नाम पर अपनी बगिया की देखरेख करने वाले का बच्चा बीमार था तब नानक देव जी ने बच्चे को जल दिया और सर पर हाथ रखा तो वह ठीक हो गया था। सहगल परिवार के अलावा उससे लगी साहनपुर रियासत ने अपनी भूमि गुरुद्वारे को दान कर दी थी।लेकिन गुरू नानक देव जी मौहल्ला रमपुरा में भी किसी अग्रवाल के खेत पर विश्राम के लिए रूके थे। जहां उनके नाम पर नानक बगीची बनाई गयी थी जो तहसील के राजस्व रिकार्ड में नानक बगीची के रूप में दर्ज हुई वयोवृद्ध सरदार रघुवीर सिंह बताते हैं वैसे तो नजीबाबाद में गुरुद्वारा बने 91-92 वर्ष हो गये है। तीन बार भवन में बदलाव किया गया है लेकिन भारत विभाजन के बाद भारत आएं सिक्ख परिवार सरदार रवेल सिंह , सरदार अवतार सिंह,लाला ईश्वर दास,सरदार मंगल सिंह , सरदार इकबाल सिंह,सरदार मंगल सिंह, सरदार विशन सिंह,बहादुर सिंह कालरा,गुरूमुख सिंह,लहना सिंह,गोपाल सिंह,गुलाब सिंह,मालिक सिंह आदि ने नजीबाबाद के चुनिंदा सिक्ख परिवार के सहयोग से नजीबाबाद में 1947 में गुरू सिंह सभा का गठन कर गुरू नानक देव की स्मृति को संजोएं रखने के लिए गुरुद्वारे के इस भवन का निर्माण कराया था। वर्ष 1967 में गुरुद्वारा परिसर जीवन सिंह सहगल ने निशान साहिब स्थापित किया गया था।जबकि 1968 में गुरुद्वारा भवन का जीर्णोद्धार कराया गया था। तब गैर सिक्ख समाज के लोगों ने भी आर्थिक सहयोग दिया था। साहू सुरेश चंद्र अग्रवाल ने एक कक्ष व लाला ईश्वर दास कोहली गुरुद्वारा का लोहे का गेट लगवाया था। सहजधारी (बिना पगड़ी) काफी लोग गुरुद्वारा से गुरूद्वारा की सेवा करते आए हैं। कमेटी के प्रधान सरदार नरेंद्र सिंह बाधवा कोषाध्यक्ष हरमिंदर सिंह, सतेन्द्र खन्ना,हरभजन सिंह सहगल, मनमोहन सिंह कोहली का कहना है कि आगामी दो वर्ष में समाज के लोगों के आर्थिक सहयोग से 2700 वर्ग गज में भव्य,विशाल, आकर्षक व यादगार भवन तैयार किया जाएगा। भोर में गुरुद्वारे से गुरुवाणी , शब्द कीर्तन , प्रभात फेरी व अरदास की आवाज से वातावरण भक्तिमय हो जाता है तो गुरू नानक देव के जन्मोत्सव पर नगर कीर्तन से नगर सिक्ख आस्था में डूब जाता है । ----------------------------------------गुरूद्वारा प्रबंध समिति द्वारा संचालित है शिक्षण संस्था ----------------------------------------गुरूद्वारा नानक शाही गुरु सिंह सभा नजीबाबाद की प्रबंध समिति द्वारा सामाजिक दायित्व के तहत पूर्व माध्यमिक विद्यालय व गुरु नानक इंटर कालेज का संचालन भी किया जा रहा है । जिसमें प्रतिवर्ष सैकडों विद्यार्थी शिक्षा अध्ययन कर समाज व राष्ट्र सेवा को समर्पित हो रहे हैं। ---------------------------------------- सिख संगतों के लिए शरणस्थली बना गुरुद्वारा ----------------------------------------नजीबाबाद नगर में होकर नानकमत्ता ,हेमकुंड साहिब, केदारनाथ ,बदरीनाथ यात्रा जाने वाले सिख संगतों के लिए इस गुरुद्वारा के द्वार हमेशा खुले रहते हैं । उनके विश्राम, स्नान,भोजन, नाश्ते की व्यवस्था प्रबंध समिति द्वारा की जाती है। नये भवन में भविष्य में ऐसे जत्थों के लिए जरूरत की समस्त आधुनिक सुविधाएं भी उपलब्ध रहेगी। --------------------------------------- भारत का पहला गुरुद्वारा 1521 में करतारपुर में बनाया गया ---------------------------------------- सिख धर्म द्वारा पहला गुरुद्वारा भारत में पंजाब में रावी नदी के किनारे करतारपुर में बनाया गया था। देश विभाजन के बाद यह हिस्सा पाकिस्तान में चला गया लेकिन भारत का पहला गुरुद्वारा आज भी पश्चिम पंजाब के नरोवाल जनपद के करतारपुर (पाकिस्तान) की शान है। इस ऐतिहासिक पौराणिक गुरुद्वारा को दरबार साहिब , स्वर्ण मंदिर व हरमंदिर साहिब के नाम से भी जाना जाता है। जबकि वर्ष 1577 में पंजाब के अमृतसर में श्री गुरु ग्रंथ साहिब की स्थापना करके गुरुद्वारा स्थापित किया गया जो आज भारत ही नहीं विश्व में स्वर्ण मंदिर के रूप में जाना जाता है। ----------------------------------------गैंडीखाता में गुरु नानक देव का हुआ था ठहराव,बना गुरुद्वारा --------------------------------------- नानकमत्ता से हरिद्वार जाते समय सिख धर्म के संस्थापक व प्रथम गुरु नानक देव ने नजीबाबाद के बाद हरिद्वार से 20 किमी पूर्व गैंडीखाता नामक स्थान पर 13 दिन रूक कर धर्म का प्रचार प्रसार किया था। वर्ष 1577 में सिख अनुयायियों ने गुरुद्वारा का निर्माण कराया था। गैंडीखाता का गुरुद्वारा श्री संत सागर बावली साहिब आज भी देश विदेश के सिक्ख समाज के लिए विशेष महत्व रखता है। ----------------------------------------गुरू नानक देव ने 1469 में तलबंदी में जन्म लिया ----------------------------------------भारत की पवित्र करतारपुर की भूमि धन्य है जहां पिता कल्याण चंद मेहता व माता तृप्ता मेहता के घर 15 अप्रैल 1469 को नानक ने तलबंदी नामक स्थान पर जन्म लिया। धर्म,समाज सद्भाव के लिए जीवन जीने वाले नानक ने जब सिख धर्म की स्थापना की तब उनका नाम गुरु नानक देव पड़ा। 22 दिसम्बर 1539 को करतारपुर में निधन हुआ। सिख धर्म के संस्थापक व प्रथम गुरु के रूप में नानक देव का जन्म दिन गुरू नानक जयंती के रूप में समूचे विश्व में मनाया जाता है। उन्होंने सिक्ख धर्म की स्थापना के साथ गुरुग्रंथ साहब, गुरूवाणी,बारहमासा ग्रंथ की रचना की है जो सिख समाज के धार्मिक ग्रंथ के रूप में आज भी पूजा की जाती हैं। प्रस्तुति - मुकेश सिन्हा
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