शिक्षाविद चैतन्य स्वरूप गुप्ता
शिक्षाविद
चैतन्य स्वरूप गुप्ता
प्रसिद्ध अंग्रेजी कवि शेक्सपियर ने लिखा है कि
कुछ लोग बड़े घराने में
जन्म लेने
के कारण महान कहलाते हैं , कुछ
पर अनायास महानता थोप दी जाती है , और कुछ अपने महान कार्यों
से महानता अर्जित कर लेते हैं ।महान कार्यों से महानता अर्जित करने वाले थे
प्रधानाचार्य चैतन्यस्वरूप गुप्ता।
उत्तर
प्रदेश में जनपद बिजनौर के मुख्यालय के एक
प्रमुख इंटर कॉलेज -- राजा ज्वाला प्रसाद आर्य
इन्टर कॉलेज के ख्याति प्राप्त पूर्व प्रधानाचार्य स्व. चैतन्य
स्वरूप गुप्ता ने शिक्षा - क्षेत्र में अपने
अद्वितीय योगदान के कारण महानता की श्रेणी प्राप्त की । वे शिक्षा के क्षेत्र में अपने विशिष्ट योगदान के लिए राष्ट्रपति द्वारा प्रदत्त राष्ट्रीय पुरस्कार
- 1979 से सम्मानित किए गए।
श्री चैतन्य स्वरूप गुप्ता का जन्म 21 जनवरी, 1926 को अनूपशहर
(जिला बुलंदशहर) में हुआ था जहां उनके पिता , बिजनौर निवासी श्री आनन्द स्वरूप गुप्ता
कानूनगो पद पर कार्यरत थे । चैतन्य स्वरूप गुप्ता पांच भाई - बहनों में सबसे छोटे
थे । विभिन्न स्थानों पर अध्ययन करने और
अन्त में अर्थशास्त्र में एमए,एलटी की डिग्री प्राप्त करने के बाद वे बिजनौर आ गए । यहां
उनके पिता रिटायरमेंट के बाद आ गए थे । सन 1950 में राजा ज्वाला प्रसाद आर्य इन्टर कॉलेज में अर्थशास्त्र
प्रवक्ता पद पर उनकी नियुक्ति हो गई । अपनी प्रतिभा के बल पर शीघ्र ही उन्होंने
कॉलेज के प्रधानाचार्य पद पर प्रोन्नति पायी और 32 वर्ष इस पद पर रहते हुए शिक्षा क्षेत्र
में समाज की उल्लेखनीय सेवा की और उक्त
कॉलेज को जनपद के श्रेष्ठ विद्यालयों की अग्रिम पंक्ति में खड़ा कर
दिया ।
उनके कार्यकाल में कॉलेज ने अपने अनुशासन , उच्च शिक्षा - स्तर ,
श्रेष्ठ
परीक्षा परिणाम , खेल - कूद के क्षेत्र , सांस्कृतिक एवं शैक्षिक गतिविधियां , वैज्ञानिक प्रदर्शनियां , इत्यादि क्षेत्रों में दूर - दूर तक ख्याति प्राप्त कर ली ।इस कॉलेज में अध्ययन के लिए प्रवेश पाना
छात्रों के लिए सौभाग्य की बात समझी जाती
थी।
श्री चैतन्य स्वरूप गुप्ता एक कुशल प्रशासक
होने के साथ ही एक प्रवीण शिक्षक भी थे । वे
' गुरु कुम्हार शिष्य कुंभ है ,/गढ़ ,गढ़ काढ़े खोट ।
अन्दर हाथ सहार दे,बाहर बाहे चोट ' उक्ति को चरितार्थ करते हुए छात्रों
को अनुशासन का पाठ पढ़ाते , साथ ही उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुनते
, समझते और सुलझाते थे ।
छात्रों में उनके प्रति सदैव बड़ा
सम्मान और श्रद्धा की भावना थी ।
कॉलेज
के समस्त शिक्षकों व अन्य स्टाफ - सदस्यों के साथ श्री चैतन्य स्वरूप गुप्ता के
संबंध सदैव मधुर बने रहे । उन्हें सदैव ही
सबका पूर्ण सहयोग प्राप्त होता रहा ।
समाज में
श्री गुप्ता का बहुत मान , सम्मान
और नाम था । वे बहुत मिलनसार और शिष्ट आचरण वाले व्यक्ति थे , जरूरत - मंद व्यक्ति की सहायता करने
में , और सामाजिक हित के कार्यों को करने में
वे सदैव आगे रहते थे ।
शिक्षा के क्षेत्र में अपने विशिष्ट योगदान के
लिए राष्ट्रपति द्वारा प्रदत्त राष्ट्रीय
पुरस्कार - 1979 से सम्मानित किए गए। गुप्ता जी की सबसे
बड़ी चारित्रिक विशेषता यह थी कि वे अपने ऊपर किए गए किसी भी उपकार करने वाले का अहसान नहीं भूलते थे । हृदय
से कृतज्ञता मानना और व्यक्त
करना उनकी प्रकृति का अभिन्न अंग
था । राजा ज्वाला प्रसाद जी के परिवार
(जो धर्मनगरी परिवार के नाम से जान जाता है ) द्वारा स्थापित राजा ज्वाला प्रसाद
इन्टर कॉलेज के संस्थापक -प्रबंधक कुंवर सत्यवीर जी ने चैतन्य स्वरूप गुप्ता जी को
कॉलेज में पहले शिक्षक पद पर नियुक्ति दी
और फिर प्रधानाचार्य पद पर प्रोन्नत किया और हर प्रकार से सदैव उनको
सहारा दिया , इस उपकार के लिए वे जीवन पर्यन्त कुंवर
साहब के , और पूरे धर्मनगरी परिवार के हृदय से कृतज्ञ रहे । यहां तक कि कुंवर साहब के निधन के बाद और अपने रिटायरमेंट के बाद भी
धर्मनगरी परिवार के प्रति समर्पित रहे।
श्री चैतन्य स्वरूप गुप्ता जी का पारिवारिक
जीवन भी उतने ही सुख और प्रेम से गुजरा जितना उनका व्यवसायिक और
सामाजिक जीवन । उनकी धर्मपत्नी श्रीमती कुसुम लता, निवासिनी महलवाला , जिला
मेरठ , एक
अत्यन्त गुणी , नेक , सहृदय और दयावान महिला थीं । लगभग 60 वर्ष के सुखद वैवाहिक जीवन के
बाद , दुर्भाग्यवश वर्ष 2008 में इस देवी का
निधन हो गया।
श्री गुप्ता जी के दो पुत्र और दो पुत्रियों
थीं । उन्होंने सभी को उच्च शिक्षा -
दीक्षा दिलायी । सभी जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में प्रतिष्ठित पद पर पहुंचे , और अपने - अपने परिवारों सहित समाज में सुखमय जीवन व्यतीत कर रहे हैं । उनके ज्येष्ठ पुत्र विनीत कुमार ,जो मुंबई में अपने परिवार के साथ रह
रहे थे , दुर्भाग्यवश वर्ष 2007 में
स्वर्ग सिधार गये जो गुप्ता जी के
लिए एक बड़ा आघात था ।
गुप्ता
जी ने अपने विद्यार्थी काल में अपने कई
निकट संबंधियों के यहां रहकर अपनी पढ़ाई पूरी की थी । वे उपकार का अहसान मानने वाले व्यक्ति थे । उन्होंने भी
अपने यहां कई रिश्तेदारो के बच्चों को रखा और पढ़ाया ।
श्री
चैतन्य स्वरूप गुप्ता जी का एक अल्प बीमारी
के बाद उनके बिजनौर स्थित निवास पर , 95 वर्ष की आयु में २४ मई २०२१ में निधन हो गया । उस समय उनके
बच्चे और स्वजन वहां उपस्थित थे ।
आज श्री चैतन्य स्वरूप गुप्ता जी की जन्मशती है
। हम इस कर्मयोगी की पुण्य स्मृति को श्रद्धापूर्वक नमन करते हैं औ इस महान आत्म
को हार्दिक श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं ।
−वीपी गुप्ता
पूर्व
प्रवक्ता और शिक्षाविद
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